चंद्रग्रहण के दौरान कुछ यूं नजर आया चांद, जाने चंद्रग्रहण से जुड़े रोचक तथ्य

गुरु पूर्णिमा यानि 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण लगा। इस चंद्रग्रहण की अवधि करीब 3 घंटे 55 मिनट रही। इस दौरान एक घंटे 43 मिनट तक तो पूर्ण चंद्रग्रहण रहा। ग्रहण 27 जुलाई को रात 11 बजकर 54 मिनट से शुरू हुआ और 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर खत्म हो गया। रात दो बजे तो चांद पूरी तरह से लाल हो गया। भारत समेत दुनियाभर के लोगों ने इस सबसे बड़े चंद्रग्रहण को देखा। खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी और चांद के बीच ज्यादा दूरी की वजह से ही इस बार ग्रहण का वक्त 1914 के बाद सबसे ज्यादा 3 घंटे 54 मिनट और 33 सेकंड रहा। आपको बता दें कि इस साल 31 जनवरी को भी पूर्ण चंद्रग्रहण था। तब इसकी अवधि 1 घंटा 40 मिनट थी, जबकि 4 अप्रैल 2015 को सदी का सबसे छोटा चंद्रग्रहण लगा था। इसकी अवधि सिर्फ 4 मिनट 48 सेकंड थी। अब 31 दिसंबर 2028 को अगला पूर्ण चंद्रग्रहण लगेगा।
भारत समेत पूरी दुनिया की निगाहें इस पर चंद्रगृहण पर लगी थी। इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए लोग अपने घरों से बाहर निकले और अपने-अपने तरीके से लोगों ने इसे देखने की कोशिश की। इंडिया में शुरुआत में तो आंशिक चंद्रग्रहण ही रहा लेकिन बाद में इसने पूर्ण चंद्रग्रहण का रूप ले लिया। भारत के अलावा यूरोप, एशिया के ज्यादातर देशों, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और आसपास के देशों, उत्तरी अमेरिका, प्रशांत क्षेत्र, अटलांटिक, भारतीय महासागर और अंटार्कटिका में चंद्र गृहण दिखाई दिया।

इस वजह से लगता है चंद्रगृहण

जब सूरज और चांद के बीच पृथ्वी इस तरह से आ जाती है कि पृथ्वी की छाया से चांद पूरी तरह या आंशिक तौर पर ढक जाता है तो ऐसी स्थिति में पृथ्वी चांद की किरणों को चांद तक नहीं पहुंचने देती, जिसकी वजह से पृथ्वी के उस हिस्से में चंद्रग्रहण नजर आता है।

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