राम मंदिर को लेकर साधू-संतो का मोदी सरकार को अल्टीमेटम

दिल्ली में राम मंदिर को लेकर वीएचपी की बैठक हुई। इस दौरान संतों ने सरकार को शीतकालीन सत्र तक की मोहलत देते हुए साफ साफ कहा है कि वो इससे ज्यादा इंतज़ार वो नहीं करेंगे।

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का वक्त जैसे-जैसे करीब आ रहा है,अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर रस्साकशी भी तेज होती जा रही है। साधू-संतो ने राम मंदिर बनाने को लेकर एक बार फिर मोदी सरकार को चेतावनी दी है। दिल्ली में वीएचपी की बैठक के दौरान संतों ने सरकार को शीतकालीन सत्र तक की मोहलत देते हुए साफ साफ कहा है कि वो इससे ज्यादा इंतज़ार वो नहीं करेंगे। संत पर अब इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब चाहते हैं। इसके लिए बाकायदा पीएम मोदी को अयोध्या बुलाने की तैयारी भी रही है। संतों की तरफ से पीएम को न्योता भेजा जाएगा।

दिल्ली में वीएचपी के दफ्तर में मंदिर निर्माण के मुद्दे पर संतों की उच्चाधिकार समिति की मीटिंग की अध्यक्षता महंत नृत्य गोपाल दास ने की। इसके बाद संतों ने सरकार को 31 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है। सरकार से कहा गया है कि कानून के जरिए मंदिर बनाने का रास्ता साफ करें। अगर कानून नहीं बना तो सरकार आंदोलन के लिए तैयार रहे। संतों ने साफ किया कि मंदिर निर्माण में देरी मंज़ूर नहीं की जाएगी। संतो की तरफ से ये भी मांग की गई है कि सरकार राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश लेकर आए। इसके लिए संतों का डेलीगेशन हर राज्य के राज्यपाल से मिलेगा। साथ ही सभी सांसदों से मिलकर मंदिर बनाने के लिए मदद मांगी जाएगी। संतो के डेलीगेशन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की है और राम मंदिर का वरदान मांगा है।

आपको बता दें कि 29 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट इस केस सुनवाई करेगा। सरकार कोर्ट के फैसले का इंतज़ार करने के पक्ष में है लेकिन संत इंतज़ार नहीं करना चाहते। संतों की दलील है कि जब सरकार SC/ST एक्ट संसोधन पर संसद से क़ानून बना सकती है। ट्रिपल तलाक़ बिल पर अध्यादेश ला सकती हैं तो राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश क्यों नहीं ला सकती। वीएचपी के मुताबिक 31 जनवरी और 1 फरवरी को इलाबाद में कुंभ के दौरान धर्म संसद होगी और अगर सरकार फैसला नहीं करती है तो संत वहां अगली रणनीति तय करेंगे।

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