यूथ फॉर इक्वालिटी ने सवर्ण आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तय किए गए 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन करता है।
सवर्ण आरक्षण बिल को लेकर जिस बात की आशंका कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी पार्टियां जता रही थीं वही हुआ है। गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यूथ फॉर इक्वालिटी ने सवर्ण आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तय किए गए 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन करता है। ऐसे में इस आरक्षण को इजाजत नहीं दी जा सकती है।
इससे पहले बुधवार देर शाम सवर्ण आरक्षण बिल राज्यसभा से पास हुआ था। अभी इस पर राष्ट्रपति की मुहर लगनी बाकी है। लेकिन बिल के पास होने के 24 घंटे के भीतर ही इसे कोर्ट में चुनौती दी गई है। बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में कांग्रेस समेत कई दूसरी पार्टियों ने बिल की खामियों को लेकर मोदी सरकार को आगाह किया था और सरकार से इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की वकालत की थी, ताकि इसके अंदर की खामियों को दूर किया जा सके। लेकिन सरकार बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने के पक्ष में नहीं थी और आखिरकार बिल को संसद से पास कर दिया गया।
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