और कितना गिरेगा रुपया ?

डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरने का सिलसिला जारी है। एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 70.57 पर आ गया है। रुपये के लगातार गिरने से आम आदमी और सरकार दोनों की मुश्किलें बढ़ेंगी। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल ज्यादातर देशों से डॉलर में खरीदता है। ऐसे में ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे। लिहाजा देश में पेट्रोल-डीजल समेत कई चीजें महंगी हो जाएंगी। इस साल रुपए में 9.4% गिरावट आई है। दूसरी एशियाई करंसी के मुकाबले इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। जनवरी से लगातार रुपए में गिरावट बनी हुई है। 18 साल में ये गिरावट का सबसे लंबा दौर है।

एक्सपर्ट्स की माने तो आगे भी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का दौर जारी रह सकता है। दरअसल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आए सुधार के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है। इसीलिए दुनियाभर की करेंसी पर दबाव है। हालांकि, देश में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है।

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