जिस पर ताज की देखरेख का है जिम्मा उससे मोदी-योगी सरकार ने सुरक्षा पर नहीं ली सलाह, SC ने फटकारा

सुप्रीम कोर्ट में ताजमहल की सुरक्षा को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान ताजमहल की सुरक्षा को लेकर तैयार किए गए मसौदे से भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण को अलग रखने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि ताजमहल की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील एडीएन राव ने अदालत को बताया कि ताज की देखभाल की जिम्मेदारी भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पास है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर क्यों एएसआई को ताज की सुरक्षा और संरक्षण के लिए तैयार किए गए दस्तावेज प्रक्रिया से बाहर रखा गया।

कोर्ट ने आदेश दिया कि विजन दस्तावेज की एक कॉपी एएसआई को भी मुहैया कराई जाए और इसे इंटैच, आगा खान फाउंडेशन, आईसीओएमएस और दूसरे समान ईकाइयों के साथ साझा किया जाए, जिनके पास इस तरह के ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा और इसे बनाए रखने की महारत हासिल है।

ताजमहल की उपेक्षा पर नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यूनेस्को मुगल स्मारक को अपनी विश्व धरोहर सूची से बाहर कर दे तो आप लोग क्या करेंगे।

वहीं न्यायमूर्ति लोकुर ने हलफनामे में कही गई बातें और अदालत के सामने मौखिक रूप से पेश ब्योरे में बदलावों की ओर इशारा करते हुए कहा, “जो भी हो रहा है, उसे समझना बेहद मुश्किल है। कुछ बातें हलफनामे में कही गईं, कुछ मौखिक रूप से और कुछ ऐसे ही कह दी गईं। यह मंजूर नहीं है।”

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