नोटबंदी की बरसी पर बोली कांग्रेस, मोदी के फैसले के जख्म, निशान वक्त के साथ होते जा रहे और गहरे

नोटबंदी की दूसरी बरसी पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला। मोदी के अर्थशास्त्र के ज्ञान की खिल्ली उड़ाते हुए कांग्रेस ने नोटबंदी के उनके फैसले को लापरवाही का फैसला करार दिया।

कांग्रेस ने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई और अनेक लोगों की जानें गईं। मोदी द्वारा 2016 में चलन में रहे 1,000 और 500 रुपये के नोट पर प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले की दूसरी बरसी पर कांग्रेस ने ‘नोटबंदी से विनाश’ नाम से एक अभियान शुरू किया, जिसमें इस कदम से हुई तबाही और इसकी नाकामयाबी को प्रमुखता से उजागर किया गया है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत पार्टी के कई नेताओं ने नोटबंदी की आलोचना की। नोटबंदी को एक ‘अशुभ’ और ‘बिना सोचे समझे’ उठाया गया कदम करार देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि इस फैसले के जख्म और निशान वक्त के साथ ज्यादा स्पष्ट दिखने लगे हैं और इसके गंभीर प्रभाव अभी भी सामने आ रहे हैं।

नोटबंदी के फैसले के दो साल पूरे होने पर उन्होंने सरकार से आगे किसी प्रकार के ऐसे अपरंपरागत, अल्पकालिक आर्थिक उपायों को स्वीकृति नहीं देने को भी कहा, जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में और अधिक अनिश्चितता का कारण बन सके। सिंह ने कहा कि आठ नवंबर यह याद करने का दिन है कि ‘कैसे एक आर्थिक विपदा ने लंबे समय के लिए राष्ट्र को प्रभावित किया।’ उन्होंने सरकार से आर्थिक नीतियों में निश्चितता व पारदर्शिता बहाल करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “मोदी सरकार द्वारा 2016 में बिना सोच-समझकर उठाए गए कदम, नोटबंदी के आज दो साल पूरे हो गए हैं। इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज में जो विध्वंस हुआ, उसके सबूत आज सभी के सामने हैं।” उन्होंने एक बयान में कहा, “अक्सर कहा जाता है कि समय सबकुछ ठीक कर देता है। लेकिन दुर्भाग्यवश नोटबंदी के मामले में इसके जख्म और निशान वक्त से साथ और हरे होते जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर में भारी गिरावट के बाद इसका असर अब तक सामने आ रहा है। सिंह ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़, मझोले और छोटे कारोबार अभी भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं।” उन्होंने कहा, “नोटबंदी ने हर व्यक्ति पर प्रभाव डाला। इसमें हर उम्र, लिंग, धर्म, समुदाय और क्षेत्र के लोग शामिल थे।”

मीडिया को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने नोटबंदी के लिए मोदी को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह धनशोधन की योजना था जिससे भारतीय जनता पार्टी और उसके हितैषी उद्योगपतियों को फायदा हुआ।  शर्मा ने कहा, “यह मनमाने ढंग व लापहरवाही से लिया गया फैसला था जिससे आर्थिक तबाही और विपदा आई। अनेक नागरिकों को जानें गंवानी पड़ीं, लाखों लोगों की नौकरियां चली गईं और छोटे व्यापारी व व्यवसायी तबाह हो गए।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने कभी मीडिया या संसद में जवाब नहीं दिया। वह अर्थशास्त्र में साक्षर से भी कम हैं और वह इतिहास में भी अल्पज्ञानी हैं। अर्थशास्त्र की बात करें तो उनको लगता है कि वह (जॉन मेनार्ड) कींस से भी अधिक बुद्धिमान हैं। दुनिया में किसी प्रधानमंत्री ने वैसा नहीं किया जैसा उन्होंने किया है।”

शर्मा ने कहा कि मोदी कहते हैं कि काले धन को लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था की छवि दुनिया में खराब हुई। कांग्रेस नेता ने वित्तमंत्री अरुण जेटली का भी मखौल उड़ाया, जिन्होंने नोटबंदी को उचित ठहराते हुए कहा था कि अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के मकसद से यह फैसला लिया गया है।

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