EU के सांसदों के डेलिगेशन के कश्मीर दौरे की क्या है सच्चाई?

यूरोपीय संघ के डेलिगेशन के कश्मीर दौरे को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष इसे लेकर सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने यूरोपियन यूनियन के डेलिगेशन के कश्मीर दौरे पर सरकार से सवाल उठाया है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर दौरे के लिए यूरोपियन यूनियन के सांसदों का स्वागत हो रहा है, जबकि हमारे जाने पर बैन है। राहुल गांध के अलावा कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता भी इस डेलिगेशन के कश्मीर दौरे पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार से सवाल किया कि कश्मीर मामले में EU के सांसदों को पंच क्यों बनाया गया। वहीं कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यूरोपियन यूनियन के सांसदों को जम्मू और कश्मीर जाने की इजाजत देना देश की संप्रभुता पर एक बड़ा हमला है।

क्यों उठ रहे सवाल?

कहा जा रहा है कि इस यूरोपीय संघ के सांसदों ने खुद मोदी सरकार ने बुलाया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ के सांसदों के डेलिगेशन का ये दौरा सरकारी नहीं है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद क्रिस डेविस को भारत ने कश्मीर का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन जब डेविस ने इस पर जोर दिया कि वो स्थानीय लोगों के साथ बात करने के लिए स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो भारत सरकार की तरफ से निमंत्रण को तुरंत वापस ले लिया गया। हालांकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इसकी पुष्टि भारत सरकार की तरफ से नहीं हो पाई है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक डेविस ने अपने बयान में कहा है कि वो मोदी सरकार के लिए एक पीआर स्टंट में भाग लेने के लिए तैयार नहीं हैं और यह दिखावा करने के लिए की सब ठीक है। उनके मुताबिक ये बिल्कुल साफ है कि कश्मीर में लोकतांत्रिक सिद्धांतों को तोड़ा जा रहा है और दुनिया को नोटिस लेना शुरू करना होगा।

जम्मू-कश्मीर में क्या हुआ है?

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने करीब तीन महीने पहले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही इसे दो केंद्र शासित प्रदेश में बांट दिया गया है। कहा जा रहा है कि 370 हटने के बाद से ही घाटी में लॉकडाउन है। जिसका वहां रह रहे लोगों को बुरा असर पड़ रहा है।

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