111 दिनों से आमरण अनशन कर रहे स्वामी सानंद मां गंगा के लिए मिट गए, पीएम मोदी ने सुध तक नहीं ली

मां गंगा का ये सपूत अपनी आखिरी सांसों तक मां गंगा के लिए लड़ता रहा। बीते 111 दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी सांनद को प्रशासन ने बुधवार को ऋषिकेश के एम्स में जबरन भर्ती कराया था।

‘न मैं यहां आया हूं, न मुझे लाया गया है, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है’। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पहली बार अपने संसदी क्षेत्र वाराणसी पहुंचे थे तो उनकी जुबान से यही शब्द निकले थे। मां गंगा की गोद में बैठा वाराणसी शहर को इन शब्दों से आस जगी थी कि कुछ हो न हो मां गंगा की सूरत जरूर बदलेगी। मां गंगा की सूरत तो नहीं बदली, लेकिन मोदी दरबार में सूरत बदलने की गुहार लगाने वाला मां गंगा का एक सपूत आज दुनिया को अलविदा कह गया। हम बात कर रहे हैं स्वामी सानंद की। गंगा की सफाई के लिए काननू बनाने की मांग को लेकर 111 दिनों से आमरण अनशन कर रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का गुरुवार को ऋषिकेश के एम्स में निधन हो गया। एम्स के अनुसार, कमजोरी और हार्ट अटैक की वजह से स्वामी सानंद का निधन हुआ है।

मां गंगा का ये सच्चा सपूत अपनी आखिरी सांसों तक मां गंगा के लिए लड़ता रहा। बीते 111 दिनों से अनशन पर बैठे स्वामी सांनद को प्रशासन ने बुधवार को ऋषिकेश के एम्स में जबरन भर्ती कराया था। स्वामी सांनद ने मंगलवार को जल भी त्याग दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें अनशन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया था।

मां गंगा के इस सपूत ने निधन से पहले गुरुवार सुबह अस्पताल में लिखे गए एक खत में एम्स में अपने स्वास्थ्य की और डॉक्टरों के सहयोग के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने पत्र में लिखा, “कल दोपहर करीब 1 बजे हरिद्वार प्रशासन ने मुझे जबरन मातृसदन से उठाकर ऋषिकेश के एम्स में भर्ती करा दिया। एम्स के सभी डॉक्टर मां गंगा के संरक्षण और जीर्णोद्धार की मेरी मांग और तपस्या के प्रति बहुत सहयोगी हैं। हालांकि, एक कार्यकुशल अस्पताल होने के कारण उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास, मुंह और नाक से जबर्दस्ती खिलाने, आईवी के जरिये पानी या अस्पताल में नहीं रखने के सिर्फ तीन ही विकल्प हैं। विस्तृत जांच में पता चला कि मेरे खून में पोटैशियम की गंभीर कमी और डिहाइड्रेशन की शुरुआत हो गई है। उनके जोर देने पर मैं मुंह और आईवी दोनों ही तरीके से 500 एमएल पोटैशियम प्रतिदिन लेने के लिए तैयार हो गया। मेरी तपस्या में सहयोग के लिए मैं एम्स को दिल से शुक्रिया कहता हूं।”

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मां गंगा के सपूत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से गंगा के संरक्षण के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। इस दौरान वो खतों के जरिए मोदी सरकार से गुहार लगाते रहे। यह कहते रहे कि कुछ तो सुनवाई करो सरकार, लेकिन मोदी सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंगी। उन्होंने गंगा के संरक्षण पर कानून के लिए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था, जिसका जवाब तक नहीं दिया गया। 6 अगस्त को लिखे पत्र में उन्होंने लिखा था, “इन चार सालों में आपकी सरकार की ओर से जो कुछ भी हुआ, उससे गंगा जी को कोई लाभ नहीं हुआ। उसकी जगह कॉर्पोरेट सेक्टर और व्यापारिक घरानों को ही लाभ दिखाई दे रहे हैं। अभी तक आपने गंगा से मुनाफा कमाने की ही बात सोची है।”

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कौन थे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद?

2011 में सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने से पहले स्वामी स्वरूप सानंद का नाम डॉ. जी डी अग्रवाल था। डॉ अग्रवाल आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर थे, फिर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के शुरुआती दिनों में लंबे समय तक उसके सदस्य सचिव रहे। इसके बाद ग्रामोदय विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे। मोदी सरकार से पहले तक डॉ. अग्रवाल नदियों से और पर्यावरण से जुड़ी लगभग हर उच्च-स्तरीय कमेटी का हिस्सा रहे।

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