राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने बड़ा बयान देकर उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है।
अनिल बलूनी ने आज देहरादून में बडा बयान देते हुए कहा कि राज्य के 12 नेताओं को छोड़ दें तो सारे के सारे कांग्रेसी नेता भाजपा की सदस्यता लेने को तैयार बैठे हैं। उनका कहना है कि अब कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं का मनोबल इतना टूट चुका है कि कोई भी अब कांग्रेस में नहीं रहना चाहता है। राजधानी दून में आयोजित भाजपा मीडिया सेल की कार्यशाला में भाग लेने पहुंचे अनिल बलूनी का कहना है कि अगर हरीश रावत सरीखे 12 नेताओं को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस के अन्य तमाम नेता और कार्यकर्ता भाजपा की सदस्यता लेने को तैयार बैठे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में इस समय जिस तरह की भगदड़ मची हुई है उससे साफ हो चुका है कि राज्य में अब कांग्रेस का कोई वजूद नहीं बचा है। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अब कांग्रेस में अपना भविष्य नहीं दिख रहा है।
अनिल बलूनी ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस लड़ने से पहले ही 2022 का चुनाव हार चुकी है। उनका कहना है कि भाजपा में हम सभी का स्वागत करते हैं लेकिन अगर कांग्रेस में इसी तरह की भगदड़ रही तो भाजपा को हाउसफुल का बोर्ड लगाना पड़ सकता है। यहां यह उल्लेखनीय है कि भाजपा इससे पूर्व धनोल्टी से निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार और कांग्रेस समर्थित विधायक राजकुमार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण करवा चुकी है। यही नहीं बीते कई दिनों से कांग्रेस के एक और विधायक तथा कुछ बड़े नेताओं के भाजपा में शीघ्र शामिल होने की चर्चा हवाओं में तैर रही है।
हार के डर से खेला जा रहा है माइंड गेमः कांग्रेस
भाजपा 2022 के चुनाव में अपनी संभावित हार से डरी हुई है। यही कारण है कि वह अब माइंड गेम खेलकर चुनाव जीतना चाहती है। कांग्रेस का कोई नेता या विधायक भाजपा के संपर्क में नहीं है और ना कोई कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा रहा है। भाजपा नेता इस तरह के दुष्प्रचार का सहारा लेकर कांग्रेस पर मानसिक दबाव बना रहे हैं।
कांग्रेस नेता गरिमा दसौनी का कहना है कि भाजपा सरकार नाकाम रही है। उसका काम सीएम बदलने से भी नहीं बन पाया है और न जन आशीर्वाद व सैन्य सम्मान यात्राओं से। यही कारण है कि तोड़फोड़ करने में जुटे हैं लेकिन वह कुछ नहीं कर पाएंगे। जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है। उन्होंने कहा कि यह गरजने वाले बादल हैं बरसने वाले नहीं। कांग्रेस में सैकड़ों नेता हैं सब उनके साथ जा रहे हैं तो क्यों नहीं जाते ढोल क्यों पीट रहे हैं।
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