मर चुके समाज की निशानी है मुजफ्फरपुर बालिका गृह की घटना

बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में बच्चियों के साथ हुई बलात्कार की घटना मर चुके समाज की निशानी है। बालिका सुधार गृह में जो हुआ उसे देखकर ऐसा लगता है कि हम मरी हुई आत्माओं की भीड़ का हिसा हैं। मीडिया के एक खास तबके में गजब की शांति है। टीवी चैनलों पर हो रही बहसों को देखेंगे तो मीडिया की इस मेहरबानी से परेशान हो जाएंगे। सोचिए जिस निर्भया के लिए पूरा देश एक होकर दिल्ली की सड़कों पर जमा हो गया था। नतीज़न तत्कालीन कांग्रेस सरकार को सत्ता से बेदखल होना पड़ा। वही देश एक साथ 34 बच्चियों के साथ रेप की घटना के बाद भी खामोश है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या हम सत्ता से सचमुच डर गए हैं।

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बालात्कार की एक घटना देश में भूचाल ला देती है। लाना भी चाहिए , लेकिन बिहार सरकार के खिलाफ हमारी चुप्पी एक साथ कई सवाल खड़े कर रही है।

बिहार के फायर ब्रांड नेता जिन्हें हर समय लगता है कि हिंदू खतरे में हैं। ऐसे नेता का मुजफ्फरपुर मामले पर एक ट्वीट तक नहीं आया। दंगे के आरोपियों से मिलने वाले नेताजी से यह सवाल कौन पूछेगा कि उन 34 अनाथ बच्चियों का रहनुमा कौन बनेगा।
देश की राजनीति में दिल्ली तक अपनी अहम भूमिका निभाने वाला बिहार और वहां की जनता में क्या ये कुव्वत नहीं रही कि वो सत्ता के खिलाफ सड़कों पर उतर सके?

3 जून की घटना से इस बात को काफी बल मिलता है। उस दिन शेल्टर होम के संरक्षक ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार किया गया। उसके चेहरे पर बेफिक्र हंसी थी। हाथों में हथकड़ी थी, लेकिन होठों पर मुस्कान यह बताने के लिए काफी थी कि सत्ता के खास संरक्षण में उसका बाल बांका भी नहीं किया जा सकता।

हैरानी है कि सरकार ने दबाव में आकर जांच तो सीबीआई को सौंप दी है, लेकिन जांच हाईकोर्ट की देखरेख में करवाने से इंकार कर दिया। क्यों इंकार किया इस पर सरकार से सवाल पूछने वाला कोई नहीं है।

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ऐसी घटना पर पूरा देश प्रधानमंत्री की तरफ एक आशा की निगाह से देखता है कि प्रधानमंत्री देश को कोई ऐसा संदेश देंगे, जिससे आम जनता को लगे कि सरकार इस मामले पर गंभीर है। लेकिन हर बार की तरह प्रधानमंत्री इस बार भी निराश कर गए। ऐसे में एक भय का माहौल तैयार होता है। जो प्रधानमंत्री लोगों को फिटनेस चैलेंज देते रहते हैं, उन्होंने मुजफ्फरपुर मामले पर एक टिप्पणी तक नहीं की। 18 घण्टे देश के लिए काम करने वाले हमारे पीएम क्या इतने व्यस्त हैं? उनकी चुप्पी का नतीजा देखिये। सोशल मीडिया पर एक तबका फिर सक्रिय हो गया है जो ब्रजेश ठाकुर के पक्ष में लिखकर जहर फैलाना शुरू कर दिया है।

जब आप अपने घर में आराम कर रहे होंगे तो खुद से एक सवाल कीजिएगा कि क्या आपकी खामोशी इसलिए है कि बालिका गृह में रह रही सभी बच्चियां अनाथ हैं?

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