भीड़तंत्र के हाथों मारे जा रहे हैं लोग, बीजेपी कहती है, मॉब लिंचिंग को महत्व देने की नहीं है जरूरत

मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन घटनाओं को अनावश्यक महत्व दिया जा रहा है।

देश में आए दिन गौतस्करी और गौहत्या के शक में भीड़ द्वारा लोगों की हत्याएं की जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट इसे देश के लिए चिंताजनक बता चुका है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद बीजेपी और उसके नेता मॉब लिंचिंग को गंभीर मानने को तैयार नहीं हैं। मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन घटनाओं को अनावश्यक महत्व दिया जा रहा है। सीधे तौर पर मॉब लिंचिंग की कड़ी निंदा करने के बजाय उन्होंने 1984 में हुए सिख दंगों को लेकर सवाल पूछ लिया। उन्होंने कहा कि अगर आप मॉब लिंचिंग की बात करते हैं तो 1984 क्या था? ऐसे में सवाल ये कि सीएम योगी मॉब लिंचिंग से 1984 दंगों की तुलना कर क्या बताना चाहते हैं? क्या वे 1984 दंगों का उदाहरण देकर मॉब लिंचिंग को जायज ठहराना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कानून-व्यवस्था राज्यों की जिम्मेदारी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा कि अगर कांग्रेस राई का पहाड़ बनाना चाहती है तो हम यह होने नहीं देंगे।
एक तरफ उन्होंने मॉब लिंचिंग का 1984 सिख दंगों से तुलना की तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने कहा, “हम हर किसी को सुरक्षा मुहैया कराएंगे, लेकिन यह हर एक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह हर समुदाय और धर्म की भावनाओं का आदर करे। इंसान और गायें दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। प्रकृति में दोनों की अपनी भूमिकाएं हैं।”
एक आंकड़े के मुताबिक, मॉब लिंचिंग में अब तक देश में 33 लोग जान गंवा चुके हैं। अगर इस आंकड़े पर 2010 से नजर डालें तो अब तक 85 लोगों की जान जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट इसे गंभीर बताते हुए मोदी सरकार से मॉब लिंचिंग को लेकर राज्यों को दिशा निर्देश जारी करने के साथ इसे लेकर कानून बनाने के निदेर्श दिए हैं, लेकिन बीजेपी और उसके नेताओं को मॉब लिंचिंग इतना गंभीर शायद नहीं लगता।
मोदी सरकार मॉब लिंचिंग को लेकर कितना गंभीर है इसका एक उदाहारण संसद में भी देखने को मिला। संसद में मॉब लिंचिंग के मुद्दे के सवाल का जवाब देते गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इसकी 1984 सिख दंगों से तुलना की थी। उन्होंने कहा था कि अगर मॉब लिंचिंग पर देश में इतना होहल्ला मच रहा है तो 1984 क्या था? उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने को लेकर सरकार विचार करेगी। जिस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तुरंत कानून बनाने का निर्देश दे रहा है, वह मुद्दा मोदी सरकार के लिए कितनी अहमीयत रखता है इसका अंदाजा आप देश के गृहमंत्री द्वारा संसद में दिए गए बयान से लगा सकते हैं।

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