कमलेश तिवारी हत्याकांड: आरोपी बोले- नहीं है कोई अफसोस, मर्डर के पीछे शरीयत का दिया हवाला, जानें आखिर क्या है शरीयत

हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार दोनों मुख्य आरोपियों से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है।

खबरों के मुताबिक, पुलिस की पूछताछ में आरोपी अशफाक और मोइनुद्दीन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। गुजरात पुलिस के डिप्टी एसपी ने बताया कि आरोपियों का कहना है कि उन्होंने कमलेश तिवारी की हत्या शरीयत के हिसाब से की है। आरोपियों ने ये भी कहा कि उन्हें कमलेश तिवारी की हत्या का कोई अफसोस नहीं है।

ऐसे में सवाल ये है कि जिस शरीयत का मुख्य आरोपियों ने जिक्र किया है, आखिर वो है क्या? दरअसल इस्लामी कानून को शरीयत कहते हैं। मतलब ये कि इस्लाम के कुछ कायदे कानून होते हैं, जैसे कि अन्य धर्मों के भी कुछ कायदे कानून होते हैं। इस्लामी कानून को शरीयत कहते हैं।

गौरतलब है कि कमलेश तिवारी ने पैगम्बर मोहम्मद पर विवादि टिप्पणी की थी। जिसे लेकर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और उनके ऊपर केस भी चल रहा था। इस्लाम के कानून यानी शरीयत के हिसाब से अगर कोई व्यक्ति पैगम्बर मोहम्मद की तौहीन यानी उन्हें अपशब्द कहता है तो शरीयत में उसके लिए सजा है। इस्लाम के हिसाब जो व्यक्यि पैगम्बर मोहम्मद को बुरा भला कहे यानी उनकी तौहीन करे उसकी सजा मौत है। आरोपियों ने अपने कबूलनामे में इसी शरीयत का जिक्र किया है।

दूसरा सवाल ये कि ये शरीयत यानी इस्लामी कानून कहां लागू होता है। शरीयत वहीं लागू होता जो देश ‘दारुल इस्लाम’ हो। दारुल इस्लाम का मतलब ये कि जो मुस्लिम देश हो। जैसे साऊदी अरब, ईरान, इराक आदी। ऐसे में देखा जाए तो भारत ‘दारुल इस्लाम’ नहीं है। मतलब ये कि भारत एक मुस्लिम मुल्क नहीं है। ऐसे में यहां शरीयत लागू नहीं हो सकता और न ही इसकी कोई मान्यता है। ऐसे में मुख्य आरोपियों का ये कहना कि उन्होंने शरीयत के हिसाब से कमलेश तिवारी की हत्या की है, इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। क्योंकि न तो भारत मुस्लिम देश और न ही यहां पर शरीयत यानी इस्लामी कानून लागू है।

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