पहाड़ी युवाओं को कौन नशे में धकेल रहा है?

उत्तरकाशी में रह रहे युवाओं में बहुत तेजी से नशे की लत लगती जा रही है। यहां शराब और चरस के साथ ही अफीम और स्मैक जैसा महंगा नशा भी तेजी से पैर पसार रहा है।

अफीम के नशे की बढ़ती लत की बड़ी वजह है कि यहां वन विभाग की बंजर जमीन पर नशे के कारोबारी पोश्त की खेती कर रहे हैं। ये बंजर जमीन दुधारू गाय साबित हो रही है। मोरी ब्लाक के गांवों में खाली पड़ी वन विभाग की बंजर जमीन पर पोश्त के बीज जंगल में डाल देते हैं। फसल पकने पर इससे अफीम तैयार की जाती है। नारकोटिक्स विभाग के अभियान चलाने के बावजूद इस खेती पर रोक नहीं लग सकी है। हालांकि पिछले साल विभाग ने बड़ी तादाद में पोश्त की खेती को नष्ट किया था और करीब 50 लोगों के खिलाफ  केस दर्ज किया था।

जनपद में शराब का नशा तो पहले ही आम था, अब दूसरे नशे भी पैर पसार रहे हैं। करीब साढ़े तीन लाख आबादी वाले इस जनपद में सभी कस्बों और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में खुली 16 सरकारी शराब की दुकानों से सरकार ही सालाना 45 करोड़ रुपये राजस्व वसूल रही है। हालत अब ये है कि पिछले कुथ सालों में देहरादून जैसे बड़े शहरों से स्मैक का नशा यहां तक पहुंचने लगा है।

नशे का गिरफ्त में स्कूली बच्चे?

स्कूली बच्चे तेजी से नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। एल्कोहल की अधिक मात्रा वाले सिरप के साथ ही सफेदा (व्हाइटनर) में मिलाए जाने वाले फ्लूड को भी नशे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। बताया जाता है कि उत्तरकाशी जिला मुख्यालय पर ही गंगा भागीरथी के घाटों पर स्कूली बच्चे बड़ी तादाद में नशा करते अक्सर दिख जाते हैं।

हालांकि लोगों को नशे से मुक्त कराने के लिए कोशिशें करा रहा है। लगातार जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। नशे के आदी लोगों के इलाज और मदद के लिए नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र खोले गए हैं। इसके साथ ही अवैध शराब को सीज करने की कार्रवाई भी तेजी से की जा रही है। पिछले एक साल में करीब 14 लाख की अवैध शराब पकड़ी गई है।

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