उत्तराखंड: कौन हैं सोबन सिंह जीना यूनिवर्सिटी अल्मोड़ा के पहले वाइस चांसलर एनएस भंडारी?

उत्तराखंड सरकार ने इसी साल अस्तित्व में आए सोबन सिंह जीना यूनिवर्सिटी अल्मोड़ा का पहला वाइस चांसलर एनएस भंडारी को बनाया है।

प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी को कुलपति बनाने की सिफारिश सरकार की तरफ से गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने की थी। एनएस भंडारी को तीन साल के लिए यूनिवर्सिटी की कमान सौंपी गई है। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा आवासीय सह संबद्ध विश्वविद्यालय होगा, जो अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत जिलों में प्रदेश के सभी मासटर्स और डिग्री कॉलेजों को एफिलिएशन देगा। आपको बता दें कि साल 2016 में कांग्रेस सरकार के वक्त उत्तराखंड आवासीय विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को बनाया गया था, जिसे अब नया स्वरूप दिया गया है। पंडित बद्री दत्त पांडे पीजी कॉलेज बागेश्वर, लक्ष्मण सिंह महार पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ और सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा सहित इस विश्वविद्यालय के तीन परिसर होंगे। मौजूदा आवासीय विश्वविद्यालय परिसर का इसमें पूरी तरह विलय किया जाएगा।

सरकार बढ़ाएगी यूनिवर्सिटी का कार्यक्षेत्र

नई यूनिवर्सिटी में रिसर्च, विकास से संबंधित पारंपरिक, कौशल विकास, पेशेवर रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय अधिनियम में ये प्रवधान किया गया है कि राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के जरिये विश्वविद्यालय का कार्य क्षेत्र या शैक्षणिक अधिकारिता को घटा या बढ़ा सकेगी। इसके साथ ही प्रदेस के राज्यपाल यूनिवर्सिटी के चांसलर होंगे।

कौन हैं प्रोफेसल एनएस भंडारी?

एनएस भंडारी कमेट्री के प्रोफेसर हैं। बीजेपी से उनका पुराना रिश्ता है। वो RSS से भी जुड़े रहे हैं। इसके साथ ही एनएस भंडारी अल्मोड़ा विद्यार्थी परिषद नगर अध्यक्ष से लेकर बीजेपी प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक भी रह चुके हैं। एनएस भंडारी पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने शुरुआती शिक्षा पिथौरागढ़ से हासिल की है। मिशन इंटर कॉलेज पिथौरागढ़ से इंटर पास किया। जबकि 1983 में पिथौरागढ़ डिग्री कॉलेज से ही बैचलर और मासटर्स डिग्री ली। इसके बाद IIT दिल्ली से पीएचडी की। रिसर्च के दौरान ही वो 1988 में कुमाऊं विवि में नियुक्त हो गए।

हरीश भंडारी की रिपोर्ट

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