उत्तराखंड में टिड्डियों के हमले का अलर्ट, अपने खेतों को टिड्डी दल के हमले से ऐसे बचाएं

देश के कई राज्यों में आतंक मचाने वाली पाकिस्तानी टिड्डियों का दल अब उत्तराखंड में भी हमला कर सकता है।

टिड्डियों का दल शनिवार को दिल्ली-एनसीआर पहुंच गया। कृषि विभाग ने आशंका जताई है कि टिड्डी अब उत्तराखंड की तरफ भी आ सकती हैं। इसी को देखते हुए कोटद्वार में फील्ड कर्मचारियों को क्षेत्र में बने रहने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि अधिकारी आरके गहलोत ने रविवार को कृषि विभाग के कर्मचारियों की बैठक ली। मीटिंग में उन्होंने कर्मचारियों को किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए। मीटिंग में उन्होने कर्मचारियों को ये भी निर्देश दिए कि वो इस संबंध में सभी इलाकों में किसानों को जागरुक करने वाले बैनर-पोस्टर लगाएं। टड्डियों से बचाव के लिए सभी केंद्रों में कीटनाशक भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।

ऐसे भगाएं टिड्डी

कृषि विभाग टिड्डियों को भगाने की पूरी तैयारी कर रहा है। काश्तकारों को स्प्रे मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिन काश्तकारों के पास स्प्रे मशीन नहीं है, वो विभाग से अनुदान पर स्प्रे मशीनें खरीद सकते हैं। साथ ही काश्तकारों को टिड्डी दल के खेतों में हमला करने पर ध्वनि यंत्रों जैसै कि ढोल, डीजे, मोटरसाइकिल के साइलेंसर, थाली, कनस्तर वगैरह बजाने और पटाखे फोड़ने की सलाह दी गई है। साथ ही किसानों से कहा गया है कि जिनके पास ट्रैक्टर चालित मशीनें हैं, वो मशीनों को तैयार रखें और खाली खेत में पानी भरकर रखें। बताया जा रहा है कि इन उपायों से टिड्डी दल भाग जाता है।

कितना नुकसान पहुंचा सकता है टिड्डी दल?

टिड्डी दल हर दिन हवा के रुख के साथ 150 किमी. तक की यात्रा कर सकती हैं। टिड्डियों का ये दल रास्ता में आने वाली सभी फसलों को खा जाता है। एक टिड्डी एक दिन में 2 ग्राम खाना खाती हैं, लेकिन इसकी संख्या इतनी होती है कि कई लोगों के बराबर खाना एक बार में खत्म कर देती हैं।

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