केदारनाथ ‘मास्टर प्लान’ की राह में नया अड़ंंगा, तीर्थ पुरोहित इस बात पर अड़े

केदारनाथ मास्टर प्लान की राह में एक और लग गया है। धाम के तीर्थ पुरोहितों ने मास्टर प्लान का विरोध किया है।

तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि वहां मास्टर प्लान पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। इस संबंध में पीएम मोदी को एक पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि सरकार तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों पर जबरन उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड और मास्टर प्लान थोप रही है। ऐसे में वो मास्टर प्लान के लिए अपनी एक इंच जमीन भी नहीं देंगे।

पत्र में कहा गया है कि सरकार केदारनाथ में स्थानीय निवासियों, हक-हकूकधारियों और तीर्थ पुरोहितों के पुश्तैनी मकानों को अधिग्रहित कर वहां दूसरा निर्माण कराने की कोशिश कर रही है। पत्र के अनुसार, देवस्थानम बोर्ड (पूर्व में बदरी-केदार मंदिर समिति) की मंदिर के पास कई हेक्टेयर जमीन पहले से ही मौजूद है। पुरोहितों का कहना है कि केदारनाथ में सर्वर प्लाजा का निर्माण कराना तीर्थ परंपरा और सांस्कृतिक संरचना के खिलाफ है।

पत्र के मुताबिक, केदारनाथ को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करना भी आदि शंकराचार्य की ओर से स्थापित मान्यताओं के उलट है। पत्र में कहा गया है कि इस तरह के निर्माण पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद नुकसानदायक हैं। ऐसे में इन निर्माणों के लिए तीर्थ पुरोहित अपनी जमीन और भवन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। उनका यह भी कहना है कि साल 2013 की आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए वो पहले ही अपनी जमीन दे चुके हैं। लेकिन,उसके एवज में उन्हें जो मकान दिए गए थे, उनका मालिकाना हक आज तक नहीं मिला है। यह पत्र केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज के महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती, विपिन सेमवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य केशव तिवारी, गणेश तिवारी और प्रवीण तिवारी समेत कई अन्य लोगों की ओर से पीएम मोदी को भेजी गई है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: