Nobel Peace Prize: नोबेल शांति पुरस्कार के दावेदारों की सूची में शामिल मोहम्मद जुबैर और प्रतीक सिन्हा कौन हैं?

फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) और प्रतीक सिन्हा नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं।

नॉर्वे के ओस्लो में 7 अक्टूबर को नोबेल पुरस्कारों (Nobel Peace Prize 2022) का ऐलान होने वाला है। इसके ऐलान से पहले अनाधिकारिक संभावित विजेताओं की सूची सामने आई है। सूची के अनुसार, फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) और प्रतीक सिन्हा (Pratik Sinha) इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2022) के संभावित विजेताओं में शामिल हैं।

कौन हैं मोहम्मद जुबैर?

पूरे देश में मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) और प्रतीक सिन्हा की चर्चा हो रही है। ऐसे में आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर मोहम्मद जुबैर कौन हैं?  मोहम्मद जुबैर ऑल्ट न्यूज़ (Alt News) के को-फाउंडर हैं। ऑल्ट न्यूज़ एक फैक्ट चेकर वेबसाइट है। ये वेबसाइट इंटरेट पर मौजूद फर्जी सूचनाओं की जांच करता है और तथ्यों को सही कर अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करता है। मोहम्मद जुबैर ने ऑल्ट न्यूज़ वेबसाइट को 2017 में शुरू किया था। इस वेबसाइट का हेड क्वार्टर गुजरात के अहमदाबाद में है।

मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) बेंगलुरु के रहने वाले हैं। वह पेशे से एक पत्रकार हैं। सोशल मीडिया पर मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) को फॉलो करने वालों की बड़ी तादाद है। उनके अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म अकाउंट्स पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। इंस्टाग्राम पर जुबैर के लगभग 35.8 हजार फॉलोअर्स हैं। इसी तरह ट्विटर पर जुबैर के 624.6 हजार फॉलोवर्स हैं।

प्रतीक सिन्हा कौन हैं?

प्रतीक सिन्हा (Pratik Sinha) ऑल्ट न्यूज़ के एडिटर हैं। वह एक फॉर्मर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और फिजिसिस्ट, लॉयर और ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट मुकुल सिन्हा के बेटे हैं। 2016 में गुजरात के ऊना में एक फेक न्यूज़ के चलते जब एक मृत गाय की खाल निकालने के आरोप में चार दलितों बुरी तरह से पीटा गया था तो उसे देखकर प्रतीक सिन्हा (Pratik Sinha) को फेक न्यूज़ के दुष्प्रभाव होने का अहसास हुआ था। इसके बाद उन्होंने 2016 में अपनी फ्री लांसिंग जॉब छोड़कर फेक न्यूज़ को लगाम कसने के लिए वेबसाइट बनाने के बारे में विचार किया था।

विवाद से सुर्खियों में आए थे मोहम्मद जुबैर

मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर एक भड़काऊ ट्वीट करके लोगों के बीच धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगा था। इसके बाद उन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इस केस में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

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