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अरुण जेटली की ये सच्चाई जानकर पूरा देश उन्हें कर रहा शत्-शत् नमन

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। 67 साल की उम्र में दिल्ली के AIIMS में उनका निधन हो गया। वो काफी वक्त से बीमार थे और उनका इलाज चल रहा था।

अरुण जेटली ने भारतीय राजनीति में जो योगदान दिया उससे से तो सभी वाकिफ हैं, लेकिन ये बहुत कम लोग ही जानते हैं कि निजी स्तर पर भी वो दूसरों की बहुत मदद करते थे। जेटली खुद बहुत पढ़े लिखे थे। कुशल राजनेता होने के साथ ही वो बड़े वकील भी थे। पढ़ाई की अहमियत को वो बहुत अच्छे से जानते थे।

जेटली कभी भी कर्मचारियों के बच्चों के साथ भेदभाव नहीं करते थे। वो कर्मचारियों के प्रतिभावान बच्चों को भी वहीं पढ़ाते थे, जहां उनके बच्चों ने शिक्षा हासिल की। उनके कर्मचारियों के बच्चे चाणक्यपुरी स्थित उसी कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े, जहां जेटली के बच्चों ने पढ़ाई की। यही नहीं जेटली कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई को लेकर इतने फिक्रमंद थे कि अगर कर्मचारी का कोई प्रतिभावान बच्चा विदेश में पढ़ने का इच्छुक होता था तो उसे विदेश में वहीं पढ़ने भेजते हैं, जहां जेटली के बच्चे पढ़े हैं। अरुण जेटली ने ड्राइवर जगन और सहायक पद्म समेत करीब 10 कर्मचारि करीब 2-3 दशकों से जेटली के साथ जुड़े हैं। इनमें से तीन के बच्चे अभी विदेश में पढ़ते हैं।

सहयोगी के बच्चों को बनाया डॉक्टर-इंजीनियर

अरुण जेटली के परिवार के खाने-पीने की पूरी व्यवस्था देखने वाले जोगेंद्र की दो बेटियों में से एक लंदन में पढ़ रही हैं। जबकि संसद में जेटली के साथ रहने वाले सहयोगी गोपाल भंडारी का एक बेटा डॉक्टर और दूसरा इंजीनियर बन चुका है। इसके अलावा अगर किसी कर्मचारी का कोई भी बच्चा प्रोफेशनल कोर्स करना चाहता है तो वो उसकी फीस भी भरते थे। साल 2005 में जेटली ने अपने सहायक रहे ओपी शर्मा के बेटे चेतन को लॉ की पढ़ाई के दौरान अपनी 6666 नंबर की एसेंट कार गिफ्ट दी थी।

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