फोटो: सोशल मीडिया
चीन से भारत वापस लाने के बाद मानेसर शिविर में 14 दिन से निगरानी में रखे गए सभी 248 छात्रों को मंगलवार को घर भेज दिया गया। इन छात्रों में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई।
कोरोना वायरस से चीन में कोहराम मचा हुआ है। वुहान प्रांत की हालत सबसे ज्यादा गंभीर है। चीन में अब तक इस जानलेवा बीमारी से 1800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। चीन से लौटे 248 छात्रों में एक छात्र उत्तराखंड का भी है। चीन की स्थिति को याद करते हुए उत्तराखंड के छात्र संयज ने कहा, “चीन में स्थिति बेहद गंभीर है। पूरी तरह से वहां लॉक डाउन हो रखा है और हमें घरों से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। हम कई दिनों तक घरों में बंद रहे।”
हाउजोंग एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में जैविक विज्ञान से पीएडी कर रहे रोहित त्यागी ने कहा, “शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक हमें परिसर से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। चीनी अधिकारी सड़कों और इलाकों को पूरी तरह से साफ कर रहे हैं।”
उन्होंने याद करते हुए कहा कि बीमारी के लक्षण नवंबर में सबसे पहले दिखने शुरू हुए थे, लेकिन किसी को भी स्थिति का अंदाजा नहीं था। एक अन्य विद्यार्थी ने कहा, “एक बार जैसे ही वायरस ने फैलना शुरू किया, सरकार तुरंत हरकत में आई। वहां प्रतिबंध लगा दिए गए और हमें भीतर ही रहने को कहा गया।”
उन्होंने कहा कि सबसे पहले अमेरिका और फ्रांस ने अपने नागरिकों को वहां से निकलाना शुरू किया और जल्द ही भारत सरकार ने भी नागरिकों की चिंता करते हुए उन्हें सुरक्षित निकालने की कवायद शुरू की।
छात्रों ने उन्हें बचाने के लिए भारतीय अधिकारियों और सेना का धन्यवाद किया। छात्र त्यागी ने बल का शुक्रिया अदा किया और कहा कि पिछले 14 दिनों में सभी किसी भारतीय सैनिक के समान थे।
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