दिल्ली हिंसा: उत्तराखंड के लाल दिलबर नेगी को नम आंखों से विदाई, हुआ अंतिम संस्कार

दिल्ली हिंसा में मारे गए उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के थैलीसैंण ब्लॉक के दिलबर नेगी का दिल्ली के निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

उत्तराखंड समाज द्वारा सामूहिक तौर पर दिलबर सिंह नेगी का अंतिम संस्कार किया गया। दिलबर को नम आंखों से विदाई दी गई।  दिलबर नेगी 24 फरवरी की रात को उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़के हिसंक के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत से उनके पैतृक गांव में मातम पसरा हुआ है।

थैलीसैंण ब्लॉक के रोखड़ा गांव के रहने वाले 19 साल के दिलबर नेगी के पिता का नाम गोविन्द सिंह नेगी है। दिलबर के अलावा परिवार में उनके दो भाई, एक बड़ा और एक छोटा और तीन बहनें हैं। इनमें से दो बहनों की शादी हो गई है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और उनके पिता तबीयत खराब रहती है। घर की महाली हालत को देखते हुए दिलबर के बड़े भाई देवेंद्र सिंह नेगी बहुत पहले से ही गाजियाबाद में निजी क्षेत्र में काम करने लगे थे। लगभग सात महीने पहले दिलबर और उनका छोटा भाई भी 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद  रोजी रोटी कमाने दिल्ली आ गए। 

दिलबर नेगी उत्तर पूर्वी दिल्ली के शिव विहार तिराहा के पास अनिल स्वीट शॉप में काम कर रहा थे। दिलबर, मालिक बिल्डिंग में रहता थे।  24 फरवरी को शाम 3 बजे के बाद क्षेत्र में हिसंक भड़की। जानकारी के मुताबिक, जिस बिल्डिंग में दिलबर रहते थे, उसमें दंगाइयों ने आग लगा दी। ऐसे में दिबर की जलकर मौत हो गई।  

इलाके में हालत  इतने तनावपूर्ण थे कि दो दिनों तक दिलबर की कोई खोज खबर नहीं मिली। 26 फरवरी को जब मालिक पुलिस की मदद से बिल्डिंग में पहुंचा दिलबर की मौत की खबर लगी। इसके बाद दिलबर की लाश को गुरुते गबहादुर अस्पताल के मॉर्चरी में लाया गया। दिलबर के साथ रहने वाले  गांव के ही किसी परिचित ने परिजनों को सुचना दी। सुचना मिलते ही गांव से दिलबर के चाचा जगत सिंह नेगी और गाजियाबाद से भाई देवेंद्र और अन्य परिजन अस्पताल पहुंचे।  

जैसे-जैसे दिलबर की मौत की सूचना दिल्ली में फैली शहर में रहने वाले उत्तराखंड के लोग और समाजसेवी भी दिलबर की खोज खबर लेने अस्पताल पहुंचे। घटना से स्तबध उत्तराखंड समाज ने दिवंगत के परिजनों की अस्पताल की औपचारिकताओं से लेकर निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार में हर प्रकार की सामाजिक आर्थिक मदद की।  

परिजनों ने बताया की दिलबर हसमुख था और फौज में भर्ती होना चाहता था। परिवार पर आर्थिक बोझ न हो, इसलिए दिलबर दिल्ली में नौकरी कर अपना सपना साकार करना चाहता था, लेकिन किसी को नहीं पता था देश की सुरक्षा का सपना पाले उत्तराखंड का यह जवान दंगों में मारा जाएगा।  

जहा दिलबर की मौत से उसके परिवार को कभी ना भरपाई होने वाली क्षति पहुंची है, वही देवभूमि के इस जवान की मौत से उनके गांव जिले में माहौल गमगीन है। दिल्ली में रहने वाला उत्तराखंडी समाज भी निशब्द और आक्रोशित है। घटना से आहत निगम बोध घाट पर जुटे उत्तराखंड समाज के लोगों ने दिलबर के परिवार को उत्तराखंड, दिल्ली और केंद्र सरकार से न्याय और आर्थिक सहयोग दिलाने का संकल्प लेकर अपने एकता अखंडता और भाइचारे का संदेश दिया। साथ में तय किया की परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग भी पुरजोर तौर पर उठाएगी।

(इंद्रजीत की रिपोर्ट)

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