6 मई को लद्दाख के गलवान वैली में हुई हिंसक झड़प में घायल हुए जवान में उत्तराखंड का लाल हवलदार बिशन सिंह भी था, जिसकी इलाज के दौरान चंडीगढ़ में निधन हो गया। 17 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात हवलदार बिशन सिंह को रविवार को हल्द्वानी के रानीबाग स्थित चित्रशिलाघाट में अंतिम विदाई दी गई।
इस दौरान उनके अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों लोग जुटे। आपको बता दें, राजकीय सम्मान के साथ शहीद जवान बिशन सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़े भाई जीवन सिंह और बेटा मनोज ने शहीद की चिता को मुखाग्नि दी। आपको बता दें, भारतीय सेना के 17 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात हवलदार बिशन सिंह मूल माणीधामी बंगापानी पिथौरागढ़ के रहने वाले थे। उनका शुक्रवार देर रात चंडीगढ़ में निधन हो गया था। शनिवार देर रात शहीद का शहीद का पार्थिव शरीर हाल पता कमलुवागांजा में विशेष टाउनशीप कॉलोनी स्थित उनके घर लाया गया।
तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन को शहीद के घर में लोगों की भीड़ जुटी रही। शहीद का पार्थिव शरीर देखते ही पत्नी सती देवी बेसुध हो गई। शहीद का बड़ा बेटा मनोज और बेटी मनीषा पिता के पार्थिव शरीर को देखकर रोते रहे। सुबह 9:12 बजे शहीद की अंतिम यात्रा चित्रशिला घाट के लिए निकली। इस दौरान पीछे बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ आया। 10 बजे करीब तिकोनिया आर्मी कैंट और 17 कुमाऊं के जवान पार्थिव शरीर लेकर चित्रशिला घाट पहुंचे। शहीद के घर से घाट तक भारत माता की जय और जब तक सूरज चांद रहेगा बिशन तेरा नाम रहेगा जैसे नारे लगते रहे। घाट में सैन्य सम्मान के साथ जवानों शहीद को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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