उत्तराखंड में अब बीएड डिग्री धारकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने 50 फीसदी से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को उत्तराखंड में शिक्षकों के पद के लिए योग्य करार दिया है।
इसके अलावा साल 2011 से पहले डीएड करने वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक के पदों में आवेदन करने की छूट दी है। आपको बता दें, प्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा बीते दिनों सहायक अध्यापक प्रारंभिक शिक्षा के करीब 2 हजार पदों पर आवेदन के योग्य करार दिया है।
बागेश्वर निवासी पूनम पंत समेत अन्य 50 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बीएड में 50 फीसदी अंकों की बाध्यता के नियम को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया कि एनसीटीई द्वारा यह नियम 2019 में लागू किया गया, जबकि सरकार ने साल 2011 से पहले के पहले स्नातक में 50 फीसदी से कम अंकों से उत्तीर्ण बीएड डिग्रीधारी को भी आवेदन से आयोग्य करार दिया जो नियम विरुद्ध है।
जिके बाद मामले में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि विजय कुमार मलिमथ व नयायाधीश रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ ने साल 2011 से पहले के स्नातक में 50 फीसद से कम अंको वाले अभ्यर्थियों को को भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के आदेश दिए हैं।
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