पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन ही सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे।
महिलाएं भी इसी संकल्प के साथ अपने पति की आयु और प्राण रक्षा के लिए व्रत रखकर पूरे विधि विधान से पूजा करती हैं। हिंदू परंपरा में स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए तमाम व्रत का पालन करती हैं। वट सावित्री व्रत भी सौभाग्य प्राप्ति के लिए बड़ा व्रत माना जाता है। यह ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। इसी दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पती की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और बरगद की पूजा करती हैं।
इसी दिन वट (बरगद) के पूजन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सावित्री भी वट वृक्ष में ही रहते हैं। लम्बी आयु, शक्ति और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर इस वृक्ष की पूजा की जाती है, लेकिन इस बार लोगों ने लॉकडाउन की वजह से पूजा अपने घरों में ही की। अल्मोड़ा में भी जहां मंदिरों में समूह में करती थीं, वहीं इस बार शुक्रवार को उन्होंने अपने घर पर इसकी पूजा की। शभावना ने बताया कि कोरोना महामारी में सभी की रक्षा भगवान करें उनके पति नन्दन सिंह रौतेला का कहना है कि अलमोड़ा में चार-पांच मंदिरों में इसकी पूजा महिलाओ द्वारा की जाती थी, लेकिन लॉकडाउन का पालन करते हुए सभी ने अपने घरों में ही इसकी पूजा की।
(अल्मोड़ा से हरीश भंडारी की रिपोर्ट)
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