चमोली के चीन सीमा से सटे नीती और माणा घाटी के जनजातीय ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं।
वहां रहने वाले जनजातीय समूह के लोग गर्मियों में मवेशियों के साथ चीन सीमा से लगी नीती और माणा घाटी के गांवों का रुख कर देते हैं। जबकि सर्दी में नीचे की लौट आते हैं। ठंड बढ़ने पर अब एक बार फिर ये लोग नीचे ऊपरी इलाकों से नीचे के इलाकों में आने लगे हैं। इससे नीती-माणा घाटी के गांवों में सन्नाटा पसरने लगा है।
अब ठंड में करीब छह महीने तक गांव के चीन से सटे बॉर्डर की निगरानी सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) करेगी। आपको बता दें कि नीती और माणा घाटी के नीती, गमशाली, फरकिया, कैलाशपुर, बाम्पा, गुरगुटी, माणा और बामणी समेत 18 से ज्यादा गांवों में भोटिया जनजाति के लोग निवास करते हैं।
आपको बता दें कि सीमांत गांवों के ये ग्रामीण ऊनी कपड़ों को बनाने के साथ ही सेब, राजमा, आलू, चौलाई वगैरह की फसलों का उत्पादन कर अपनी आजीविका चलाते हैं। ठंड के मौसम में निचली जगहों पर आने के बाद ये पशुपालन और ऊनी कपड़े बनाते हैं। इन दिनों जब सीमांत इलाके में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया और ठंड बढ़ने लगी है तो लोग नीचे आने लगे हैं।
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