फोटो: सोशल मीडिया
चमोली में आई आपदा के एक हफ्ते बाद भी अपनों की तलाश जारी है। अब तक 50 से भी ज्यादा शव बरामद हो चुके हैं। जबकि 150 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
चमोली आपदा के बाद ये सवाल उठने लगा है कि प्रदेश में कितनी और जगह जहां इस तरह की आपदा आने का खतरा मंडरा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में अचानक आने वाली बाढ़ की जद में करीब आठ लाख आबादी है। ये आंकलन प्रदेश में विश्व बैंक की मदद से किए गए एक अध्ययन में सामने आया है। बता दें कि चार साल की रिसर्च में परियोजना 2019 में पूरी हुई और इसके तहत आपदा के जोखिम का आंकलन किया गया था।
पिछले कुछ वक्त में ग्लेशियर के तेजी से पिघलने की वजह से मौसम में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। यही वजह है कि प्रदेश में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। साल 2013 में केदारानाथ में आई आपदा भी की भी यही वजह बताई जाती है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में जिस तरह के बदलाव हो रहे हैं, उससे जाहिर है कि अतिवृष्टि, जीएलओएफ की घटनाओं में इजाफा होगा। ये जलवायु परिवर्तन की वजह से भी हो सकता है। इस तरह के मामले अब अब मानसून तक सीमित नहीं रह गए हैं। सितंबर में अतिवृष्टि के मामले सामने आए हैं। ऐसे में ग्लेशियरों को अधिक तवज्जो देने की भी जरूरत है।
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