भारत रत्न और शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान साहब वाराणसी का जिक्र करते हुए कहते थे ये बना+रस है। बनारस शब्द को बोलते वक्त वो बना और रस का छंदि विछेद करते थे।
बनारस शब्द के साथ वो गंगा-जमुनी तहजीब की ओर इशारा करते थे। लेकिन आज उस गंगा-जमुनी तहजीब को किसी की नजर लग गई है। बनारस की सुबह और शाम में वो बात नहीं रही है। 2014 में जो शहर की हवाल बदली थी उस हवा का अब असर दिखने लगा है।
किसने सोचा था कि बिस्मिलाह खान के बनारस में वो दिन भी आएगा जब BHU जैसी यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर का सिर्फ इसलिए विरोध होगा, क्योंकि वह एक मुस्लिम है। आलम ये है कि संस्कृत विद्यालय धर्म विज्ञान संस्थान के नवनियुक्त प्रोफेसर फिरोज खान को कभी RSS और ABVP से जुड़े रहे छात्रों के विरोध के चलते अंडरग्रउड होना पड़ा है। छात्रों के हंगामे के बाद फिरोज खान गायब हैं उनका मोबाइल बंद है। फिरोज खान का विरोध करने वाले छात्रों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति हमारी भावनाओं या संस्कृति से नहीं जुड़ा है तो हमें और हमारे धर्म को कैसे समझेगा?
विरोध से फिरोज खान बेहद दुखी हैं। वो कहते हैं कि कभी भी उनके समाज के लोगों और धर्मगुरुओं ने संस्कृत की तालीम हासिल करने का विरोध नहीं किया। वो कहते हैं कि संस्कृत साहित्य के बारे में जितनी मुझे जानकारी है, उतनी तो कुरान के बारे में भी जानकारी नहीं है। ऐसे में सवाल ये कि एक प्रोफेसर का विरोध सिर्फ इसलिए किया जा रहा क्योंकि वो मुस्लिम हैं आखिर क्यों? वो कौन लोग हैं जो बिस्मिल्लाह खान के बनारस में ज़हर घोल रहे हैं?
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