फोटो: सोशल मीडिया
लोकसभा चुनाव 2019 में नफा-नुकसान देखते हुए बीजेपी ने इस बार कई बड़े नेताओं का टिकट या तो काट दिया है या फिर उनकी सीट बदल दी है।
लोकसभा चुनाव आते ही राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवारों में नफा-नुकसान ढूंढने लगती हैं। पार्टी सिर्फ और सिर्फ जिताऊ कैंडिडेट को ही टिकट देना चाहती हैं। पार्टी को जो उम्मीदवार जिताऊ नहीं लगता वो उसका टिकट काटने से पहले एक पल भी नहीं सोचती फिर भले ही उस नेता ने पार्टी के लिए कितना कुछ भी किया हो। अगर जिताऊ कैंडिडेट विरोधी पार्टी में हो तो वो उसे अपने में शामिल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देती हैं। बीजेपी भी नफा-नुकसान देखकर ही कैंडिडेट को मैदान में उतार रही है।
इस बार के लोकसभा के चुनाव में बीजेपी ने सबसे पहले पार्टी के संस्थापक सदस्य लालकृष्ण आडवाणी का ही टिकट काट दिया। गांधीनगर से उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस बार चुनावी मैदान में हैं। अब मुरली मनोहर जोशी ने साफ किया है कि इस बार पार्टी उन्हें कानपुर से टिकट नहीं दिया है। मुरली मनोहर जोशी भी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। नफा-नुकसान देखते हुए बीजेपी ने बिहार की नवादा सीट से गिरिराज सिंह को हटा कर बेगूसराय से टिकट देने का फैसला किया है। पार्टी के इस कदम से गिरिराज सिंह नाराज भी हैं और पार्टी आलाकमान से पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों उन्हें बेगूसराय का टिकट दिया गया जबकि वो नवादा से मौजूदा सांसद हैं? आपको बता दें कि बेगूसराय से इस बार JNU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी चुनावी मैदान में हैं। शायद गिरिराज को हार का डर सता रहा है इसीलिए वो बेगूसराय से चुनाव लड़ना नहीं चाहते हैं।
बीजेपी ने पटना साहिब से इस बार मौजूद सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का भी टिकट काट दिया है। उनकी जगह केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद पर पार्टी ने भरोसा जताया है। टिकट नहीं मिलने से शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के शत्रु हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब वो कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस के ही टिकट वो पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद को चुनौती देंगे।
बिहार के बाद उत्तर प्रदेश की, यहां भी पार्टी ने चुनाव में फायदा और नुकसान देखते हुए कई फैसले लिए हैं। बीजेपी ने मंगलवार को जयाप्रदा को पार्टी में शामिल किया और महज 5 घंटे के अंदर ही उन्हें रामपुर सीट से टिकट दे दिया है। जयाप्रदा का मुकाबला आजम खान से होगा। इससे पहले जयाप्रदा 2004 और 2009 में एसपी के टिकट पर रामपुर से जीत चुकी हैं। 2009 में उनकी जीत का अंतर बहुत कम था और उन्होंने इसके लिए आजम खान को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में जयाप्रदा ने अमर सिंह के साथ सपा छोड़ दी।
बड़े नेताओं में बीजेपी ने इस बार जिन बड़े नेताओं की सीट बदली उसमें मेनका गांधी और वरुण गांधी का नाम भी शामिल है। वरुण गांधी को इस बार सुल्तानपुर की जगह पीलीभीत से टिकट मिला है। वरुण फिलहाल सुल्तानपुर से लोकसभा सांसद हैं। वहीं नकी मां मेनका पिछली बार पीलीभीत से जीती थीं, उन्हें इस बार सुल्तानपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा कई दूसरे नेताओं को भी पार्टी ने या तो इस बार टिकट नहीं दिया है या फिर मौजूदास सांसद की सीट बदल दी है। अब ये देखना है कि बीजेपी को इस बदलाव से कितना फायदा मिलता है।
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