ममता सरकार और सीबीआई की जंग संसद से सड़क तक जारी है।
एक तरफ ममता बनर्जी का धरना जारी है। वहीं दूसरी तरफ संसद में भी टीएमसी ने इस मुद्दे जमकर हंगामा किया। हंगामा इतना बढ़ा कि कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा में टीएमसी सांसदों ने नारेबाज़ी की। इस बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में अब कल मामले की सुनवाई होगी। सॉलिसिटर जनरल ने आशंका जताई है कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर सबूतों को नष्ट कर सकते हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी की कहा ”अगर सीबीआई कमिश्नर के खिलाफ एक भी सबूत पेश कर पाई को ऐसी कार्रवाई होगी कि कमिश्नर पछताएंगे।” आपको बता दें कि शारदा चिट फंड केस में जैसे ही सीबीआई की टीम कोलकाता पुलिस कमीश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुंची उसी के बाद ये पूरा दंगल शुरू हुआ।
कल क्या हुआ?
रविवार शाम सीबीआई की टीम शाम 6.30 बजे जैसे ही कोलकाता के पुलिस कमिश्नर के घर पहुंची, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर रैंक के दो अफसरों ने सीबीआई टीम का रास्ता रोका। उनसे कहा गया कि कमिश्नर घर पर नहीं हैं। इतना ही नहीं सीबीआई टीम के साथ हाथापाई भी गई। थोड़ी ही देर में कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के उन अफसरों को ही हिरासत में ले लिया जो छापा मारने गये थे। पूरी टीम को लेकर पुलिस थाने आ गई। इस बीच कोलकाता पुलिस के दर्जनों सिपाही सीबीआई दफ्तर पहुंचे और उसे चारों तरफ से घेर लिया। सीबीआई का आरोप है कि उनके ज्वाइंट डायरेक्टर के घर पर भी पुलिस ने धावा बोला और उनके दरवाज़े तोड़ने की कोशिश की। ये पूरा घमासान चल ही रह था कि सीएम ममता बनर्जी भी कनमिश्नर के घर पहुंच गईं।
रात 9 बजे ममता बनर्जी मेट्रो चैनल के पास धरने पर बैठ गईं। उनके साथ कोलकाता के वही पुलिस कमिश्नर भी थे। जिनसे पूछताछ करने पुलिस गई थी। रात सवा नौ बजे के करीब हिरासत में लिए गए सीबीआई अफसरों को रिहा कर दिया गया। सभी अफसर शेक्सपीयर सरणी पुलिस स्टेशन से बाहर आ गए। ममता सोमवार सुबह से धरने पर बैठी हुई हैं।
किसका मिला साथ?
कोलकाता में धरने पर बैठीं ममता बनर्जी को सबसे पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का समर्थन मिला। उसके बाद अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया। शरद पवार और चंद्रबाबू नायडू ने भी ममता से फोन पर बात की। देवेगौड़ा, स्टालिन और मायावती ने इसे अघोषित इमरजेंसी बताया और राहुल गांधी ने भी कहा उनकी पार्टी ममता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
घोटाले में राजीव कुमार का क्या है रोल?
राजीव कुमार ने ही 40 हजार करोड़ के शारदा और रोज वैली घोटाले की जांच की है। यही नहीं उन्होंने जांच करने वाली एसआईटी टीम की अगुवाई भी की। राजीव कुमार पर बतौर जांच अधिकारी धांधली के आरोप हैं। SIT अध्यक्ष के तौर पर ही राजीव कुमार ने शारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था । खबरों के मुताबिक गिरफ्तारी के दौरान ही सुदीप्त सेन से एक डायरी मिली थी जो बाद में गायब हो गई। डायरी में उन सभी नेताओं के नाम थे जिन्होंने चिटफंड कंपनी से रुपए लिए थे। आपको बता दें कि 2013 में ममता सरकार ने ही जांच के लिए एसआईटी गठित की थी।
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