राष्ट्रपति कोविंद कानपुर स्थित बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज पहुंचे। यहां पर उन्होंने अपने तीन पूर्व शिक्षकों को सम्मानित किया। इसी दौरान उन्होंने अपने गुरुओं के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया।
किसी भी शख्स की अलग पहचान उसके ऊंचे ओहदे से नहीं, बल्कि उसके संस्कार से होती है। अच्छे संस्कार ही आपको लोगों के करीब लाते हैं और उनके दिल में अलग जगह बनाते हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को विरासत में जो संस्कार मिले हैं वो उन्हें शीर्ष पर बैठे दूसरे लोगों से अलग करते हैं। एक बार फिर अपने संस्कार की वजह से वो लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।
दरअसल राष्ट्रपति कोविंद कानपुर स्थित बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज पहुंचे। यहां पर उन्होंने अपने तीन पूर्व शिक्षकों को सम्मानित किया। इसी दौरान उन्होंने अपने गुरुओं के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। गुरु-शिष्य परंपरा की इस अनूठी तस्वीर को देखकर वहां पर मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।
राष्ट्रपति के एक गुरु प्यारेलाल वर्मा सेहत की वजह से मंच पर नहीं आ पाए तो राष्ट्रपति कोविंद खुद मंच से नीचे उतर कर उनके पास गए और उन्हें सम्मानित करने के बाद पैर छू कर उनका आशीर्वाद लिया। कार्यक्राम के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि अपने गांव परौंख से आगे की पढ़ाई के लिए कानपुर आया था। गरीब परिवार से आए विद्यार्थी के लिए कानपुर में रहकर पढ़ना आसान नहीं था। वजीफे और शिक्षकों की मदद से आगे की पढ़ाई कर सका। ऐसे शिक्षकों की बदौलत ही जिंदगी संवर सकी।
राष्ट्रपति ने यहां बच्चों को नसीहत दी कि जिंदगी में जितनी भी ऊंचाई पर क्यों न पहुंच जाएं, जमीन से जुड़े रहें। उन लोगों को न भूलें, जिन्होंने आपका साथ दिया है। आप आज जो कुछ भी हैं उसमें उन लोगों का भी हाथ है।
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