वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भले ही ये कह रही हों कि कारों में आई गिरावट की बड़ी वजह लोगों का ओला उबर जैसी टैक्सी सर्विस का ज्यादा इस्तेमाल करना हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
आर्थिक मंदी के इस दौर में टैक्सी सर्विस भी अछूती नहीं है। उन पर भी इसकी मार पड़ी है। यही वजह है कि अमेरिकी मुख्यालय वाले टैक्सी एग्रीगेटर कंपनी उबर ने एक बार फिर अपने स्टाफ में कटौती की है। उसने अपनी प्रोडक्ट एवं इंजीनियरिंग टीम से 435 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है.
उबर ने दो महीने के भीतर दूसरी बार छटनी की है। इससे पहले जुलाई में उबर ने मार्केटिंग की करीब 400 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उबर की इस बार की छटनी में उसके अमेरिकी दफ्तरों से करीब 8 फीसदी कर्मचारी बाहर हो गए हैं। कंपनी की तरफ से एक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि भी की गई है। उबर की प्रवक्ता ने कहा है, ‘हमें उम्मीद है कि आगे हालात सुधरेंगे, हम अपनी प्राथमिकता के हिसाब से काम कर रहे हैं और अच्छे प्रदर्शन के आधार पर अपने को जवाबदेह बनाए हुए हैं।’
आपको बता दें कि उबर को इसी साल न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया गया है। हालांकि अब तक इसके IPO को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है। बावजूद यह अमेरिका के पिछले पांच साल के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ था और इससे कंपनी ने 8.1 अरब डॉलर रकम जुटाई थी। जून तिमाही में कंपनी को एक तिमाही का सबसे बड़ा 5.2 अरब डॉलर का घाटा हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में ओला और उबर की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। दोनों की कंपनियों के डेली राइड्स में में पिछले 6 महीनों में सिर्फ 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पहले डेली राइड्स 35 लाख थी जो अब करीब 36.5 लाख पर है।
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