फोटो: सोशल मीडिया
उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ी इलाकों में अभी भी कई ऐसे गांव हैं, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
जब इन गांवों में कोई बुनियादी सुविधा पहुंचती है तो जश्न जैसा माहौल होता है। कुछा ऐसा ही उत्तरकाशी के सीमांत विकासखंड मेरी के जीवाणु गांव में देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार इस गांव में बस पहुंची। जैसे ही बस गांव में पहुंची लोग खुशी से झूमने-नाचने और गाने लगे। ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों से साथ नाच-गाकर बस का स्वागत किया।
आजादी के बाद से ही इलाके के लोग सड़क बनाने की मांग कर रहे थे। इनकी सड़क की मांग भी 2017 में पूरी हुई थी, जब सड़क बनाने की मंजूरी मिली थी। लेकिन सड़क बनने और बस को यहां पहुंचने में करीब तीन साल समय लग गया। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत केदार कांठा ट्रैक के अंतिम गांव जीवाणु के लिए खरसाड़ी से 15 किमीटर लंबी सड़क का निर्माण दिसंबर 2017 में शुरू हुआ था, जो अब जाकर पूरा हुआ है।
जैसे ही गांव तक लड़क बनकर तैयार हुई। परिवहन विभाग की ओर से 42 सीटर बस भेजी गई। गांव में बस देखकर ग्रामीण फूले नहीं समा रहे थे। ग्रामीणों ने लोक वाद्य यंत्रों के साथ बस समेत विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार का स्वागत किया। साथ ही लोक नृत्य कर जश्न मनाया गया।
खरसाड़ी से जीवाणु तक बनी सड़क का फायदा डोभाल गांव, रमाल, कुमनाई, किया, सत्तरा, बेउडाई, देवजानी समेत कई गांवों को मिलेगा। गांव वालों का कहना है कि जीवाणु में सड़क तक पहुंचने के लिए सैलानियों को अब सिर्फ 3 किमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बीच उत्तराखंड में भी प्रश्नपत्र लीक का…
केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को…
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का आंदोलन…
उत्तराखंड के चमोली विकास परियोजनाओं को नई रफ्तार देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह…
उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित श्री बद्रीनाथ धाम में दान के प्रबंधन को लेकर सामने…
दिल्ली में झुग्गी बस्तियों को हटाकर लोगों को पुनर्वास स्थलों पर भेजने की प्रक्रिया पर…
This website uses cookies.