कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच उत्तराखंड सरकार ने कक्षा 6 से 12 वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलने का निर्णय लिया है।
जबकि संक्रमण से बचाव के लिए अभी बच्चों का कोविड टीकाकरण भी शुरू नहीं हुआ है। जिससे बच्चों में संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। राज्य में बेशक कोरोना संक्रमण के मामले काफी कम हो गए हैं, लेकिन मामले आने पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं।
वहीं सरकार की ओर से दो अगस्त से स्कूल खोले जाने की घोषणा के बाद अभिभावकों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। किसी ने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार किया तो किसी ने कोविड गाइडलाइन के तहत स्कूल खोले जाने का समर्थन किया।
कोरोना के चलते बीते साल से बच्चों की पढ़ाई खासा प्रभावित हुई है, जिसे लेकर अभिभावकों ने चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि बच्चों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती है, लेकिन इस तरह घर पर रहने से बच्चों की पढ़ाई भी संकट में है।
वहीं प्रेसन्ट्स एसोसिएशन ने सरकार के इस फैसले का पूरी तरह से विरोध किया। प्रेसन्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष असिफ़ खान ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर संभावित है एक तरह तो सरकार ने कांवड यात्रा रद कर दी है दूसरी तरफ सरकार स्कूल खोलेने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बच्चो की जिंदगी को खतने मे डाल रही है जिसका हम विरोध करते है।
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