उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में होली का त्योहार एक खास तरीके से मनाया जाता है, जिसे कुमाऊंनी होली कहते हैं।
कुमाऊंनी होली का अपना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व है। यह कुमाऊंनी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। ये त्योहार पहाड़ी सर्दियों के अंत का और नए बुआई के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है, जो इस उत्तर भारतीय कृषि समुदाय के लिए बहुत महत्व रखता है।
होली का त्योहार कुमाऊं में बसंत पंचमी के दिन शुरू हो जाता है। कुमाऊंनी होली के तीन प्रारूप हैं, बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली। इस होली में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता, वरन बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है। उत्तराखंड अपनी संस्कृति के लिये जाना जाता है, जहां पर हर पर्व को बड़े हर्षोउल्लास से मनाया जाता है।
यहां की खड़ी होली है जो पर्वतीय क्षेत्रो में रंग पड़ने के बाद ही, जहां चिर बंधन हो गया है, वहीं अब अल्मोड़ा जिले के गांवों में खड़ी होली का गायन शुरू हो गया है, जिसमें होल्यारों द्वारा हर घर जाकर होली गायन किया जाता है जो यहां की संस्कृति व मिलन की एक मिसाल है।
(अल्मोड़ा से हरीश भंडारी की रिपोर्ट)
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