हरिद्वार के नामी संत और निरंजनी अखाड़ा के पूर्व सचिव आशीष गिरि ने खुदकुशी कर ली है। उन्होंने खुद को कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
उनके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी, इसी से उन्होंने खुद को गोली मारी। बताया जा रहा है कि वो अपनी बीमारी से परेशान थे। उनका लिवर खराब हो गया था, जिसका इलाज चल रहा था। वह देहरादून के एक निजी अस्पताल में भी कुछ वक्त भर्ती थे। बीमारी की वजह से आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। उनकी खुदकुशी की खबर से हर कोई स्तब्ध है।
निरंजनी अखाडे़ के श्रीमहंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने घटना पर शोक जताया है। नरेंद्र गिरी ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने सुबह ही आशीष गिरी से फोन पर बात की थी। उन्होंने आशीष गिरी को नाश्ते केलिए मठ बुलाया था। इसके साथ ही मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और निरंजनी अखाडे़ के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने भी खुदकुशी पर दुख जताया है। रविंद्र पुरी ने कहा कि आशीष गिरी के निधन से अखाड़े सहित पूरे संत समाज को अपूर्णीय क्षति हुई है। जूना अखाडे़ के संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने भी इसे बेहद स्तब्ध करने वाली घटना बताया।
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