फोटो: ANI
भगवान केदार की डोली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के शीतकालीन धाम से प्रस्थान कर केदारनाथ धाम पहुंच गई है। 6 मई को सुबह 6.25 बजे शुभ मुहूर्त पर केदारनाथ मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।
इससे पहले बुधवार सुबह छह बजे से फाटा में बाबा केदार की पंचमुखी भोगमूर्ति की विशेष पूजा-अर्चना की गई। धाम के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी टी-गंगाधर लिंग ने आराध्य का श्रंगार कर भोग लगाया और आरती उतारी। इस मौके पर लोगों ने फूल, अक्षत से बाबा का स्वागत करते हुए दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह 7.45 बजे बाबा की पंचमुखी डोली ने अपने धाम के लिए प्रस्थान किया।
केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली बुधवार को अपने अंतिम पड़ाव गौरीकुंड पहुंच गई। बृहस्पतिवार को बाबा केदार की पंचमुखी डोली अपने धाम पहुंचेगी और 6 मई को सुबह 6.25 बजे शुभ मुहूर्त पर केदारनाथ मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। बुधवार सुबह छह बजे से फाटा में बाबा केदार की पंचमुखी भोगमूर्ति की विशेष पूजा-अर्चना की गई। धाम के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी टी-गंगाधर लिंग ने आराध्य का श्रंगार कर भोग लगाया और आरती उतारी। इस मौके पर लोगों ने फूल, अक्षत से बाबा का स्वागत करते हुए दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह 7.45 बजे बाबा की पंचमुखी डोली ने अपने धाम के लिए प्रस्थान किया।
सीतापुर, सोनप्रयाग होते हुए बाबा केदार की डोली पूर्वाह्न् 11 बजे अंतिम रात्रि पड़ाव गौरीकुंड पहुंची, जहां ग्रामीणों, तीर्थपुरोहितों ने डोली का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया। बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डा. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि बृहस्पतिवार को बाबा केदार की डोली सुबह 8 बजे धाम के लिए प्रस्थान करेगी। 17 किमी पैदल रास्ते का सफर तय कर डोली दोपहर को केदारनाथ पहुंचेगी।
6 मई को धाम में कपाटोद्घाटन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। डोली प्रभारी प्रदीप सेमवाल ने बताया कि कोरोनाकाल के चलते बीते दो वर्षों में डोली को सूक्ष्म रूप से धाम पहुंचाया गया था, लेकिन इस बार पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से गौरीकुंड तक भक्तों का उत्साह अपने चरम पर है।
तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली ने अपने मंदिर से प्रस्थान के बाद भूतनाथ मंदिर में विश्राम किया। इस मौके पर पुजारियों ने आराध्य की पूजा-अर्चना करते हुए भोग लगाकर आरती उतारी।
तुंगनाथ मंदिर के मठाधिपति राम प्रसाद मैठाणी ने बताया कि 5 मई को चल उत्सव विग्रह डोली भूतनाथ मंदिर से प्रस्थान कर विभिन्न गांवों से होते हुए रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंचेगी। जबकि 6 मई को डोली चोपता से अपने मंदिर चोपता पहुंचेगी। जहां पर विधि-विधान के साथ पूर्वाह्न् 11 बजे कपाट खोले जाएंगे। इसके बाद आराध्य की छह माह की पूजा मंदिर में ही की जाएगी।
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