राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में पढ़ने वाले उत्तराखंड के छात्रों के लिए अच्छी खबर है।
लंबे समय के बाद श्रीनगर के पास NIT उत्तराखंड को अब स्थायी परिस मिल जाएगा। सुमाड़ी में NIT परिसर केलिए भूमि पूजन किया गया। इसके साथ NIT परिसर बनाने की शुरूआत हो जाएगी। भूमि पूजन कार्यक्रम में राज्यपाल बेबीरानी मौर्य में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल और प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत भी शामिल हुए। भूमि पूजन के बाद सभी श्रीनगर रवाना हो गए। इसके बाद सभी जीआईएंडटीआई मैदान श्रीनगर में एक समारोह का आयोजन किया गया। कार्य को सभी अतिथितियों, एनआईटी के निदेशक प्रो. एसएल सोनी और कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह ने संबोधित किया।
NIT क्या है?
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) को पहले क्षेत्रीय इंजिनीयरिंग कालेज (IEC) के नाम से जाना जाता था। साल 2002 में भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इन 14 इंजिनीयरंग महाविद्यालयों का स्तर बढ़ाकर इनका नाम ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान’ कर दिया। भारत में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण के स्तर, विद्यार्थियों की गुणवत्ता और स्थापन (प्लेसमेन्ट) की दृष्टि से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के बाद इनका ही स्थान आता है। शुरूआत में साल 1959 और सला 1985 के बीच 14 IEC की स्थापना हुई थी। वर्तमान समय में 31 NIT देश में हैं।
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