फोटो: सोशल मीडिया
नागरिकता कानून को लेकर देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ लोग विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कई लोग समर्थन में रैली निकाल रहे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा दिल्ली के शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन की हो रही है। यहां करीब 47 दिनो से महिलाओं का प्रदर्शन जारी है। महिलाओं ने एक रोड को जाम कर रखा है। उनकी मांग है कि नागरिकता कानून को वापस लिया जाए। दिल्ली के शाहीन बाग में ही देरादून के परेड ग्राउंड में करीब एक हफ्ते से नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। ग्राउंड में मुस्लिम सेवा संगठन समेत कई और संगठनों का सीएए, एनआरसी के विरोध में धरना जारी है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनके ऊपर ये काला कानून थोप रही है। उनका कहना है कि ये कानून धर्मनिरपेक्षता और संविधान की मूल भावनाओं के खिलाफ है। प्रदर्शनकारी जनगीत गाकर सभी को एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं।
क्या है कानून?
नागरिकता कानून के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों जिसमें हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म शामिल हैं, अगर धार्मिक रूप से प्रताड़ित हैं तो सरकार उन्हें भारत की नागरिकता देगी। नागरिकता लेने की शर्त ये है कि वो शख्स कम से कम पांच सालों से भारत में रह रहा हो और 2014 तक देश आ चुका हो। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इसमें धार्मिंक तौर प्रताड़ित मुसलमानों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
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