फोटो: सोशल मीडिया
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में तेला कीट किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। ब्राउन प्लांट हॉपर के नाम से मशहूर ये कीट धान की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इस कीट से सबसे ज्यादा प्रभावित जसपुर ब्लॉक के हरियावाला गांव में किसान हैं। यहां के किसान बताते हैं कि शुरुआत में ये कीट पौधों के चूसता है, इसके बाद खेत सूखने लगता है। जिसकी वजह से फसल उपज ही नहीं पाती।
किसान विकास क्लब के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार के मुताबिक तेला स्थानीय भाषा में फुदका मच्छर भी कहा जाता है। यह कीट वैसे तो हर साल धान की फसल में लगता है, लेकिन इस कीटों की तादाद बहुत ज्यादा है। यह कीट एक ही दीन में धान के पौधे को चूसकर उसे पराल में बदल देता है। रासायनिक दवाओं का भी इस कीट पर बहुत ज्यादा असर नहीं हो रहा है जिससे काफी किसानों की फसल खराब हो रही है।
कीट से कैसे फसलों को बचाएं?
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस कीट से फसलों के लिए जरूरी है कि किसान खेतों में पानी जमा नहीं होने दें और उर्वरकों का इस्तेमाल भी सावधानी से करें। कीट पर नियंत्रण पाने के लिए नीम का तेल जैसे निमीसिडनया नीम गोल्ड का इस्तेमाल 10 मिली लीटर प्रति लीटर की दर से करें। इसमें डिटर्जेंट भी मिला सकते हैं। डिटर्जेंट से कीटों की प्रजनन क्षमता काफी कम हो जाती है। रासायनिक नियंत्रण में इमिडाक्लोप्रिड, इथोफेनपाक्स, पाईमेट्रोजिन, फिप्रोनील वगैरह का इस्तेमाल करें।
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