उत्तरकाशी में भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के बगोरी गांव में उस समय कौतूहल मच गया, जब भारतीय एयर फोर्स का चिनूक हेलीकॉप्टर पहली बार हर्षिल घाटी के बगोरी गांव के आर्मी हेलीपैड पर उतरा।
चीन से चल रहे टेंशन के चलते सेना बॉर्डर पर पूरी तरह से मुस्तैद है। वायुसेना के विमान भी सीमा की पहरेदारी कर रहे हैं। उत्तरकाशी में भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के बगोरी गांव में उस समय कौतूहल मच गया, जब भारतीय एयर फोर्स का चिनूक हेलीकॉप्टर पहली बार हर्षिल घाटी के बगोरी गांव के आर्मी हेलीपैड पर उतरा। चिनूक हेलीपैड पर उतरते ही उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। चिनूक की अलग बनावट की वजह से ग्रामीण उसका वीडियो बनाने लगे। गांव वालों के मुताबिक हेलीकॉप्टर करीब 15 मिनट वहां पर रुका।
दरअसल, हर्षिल घाटी और इससे आगे नेलांग और जाडुंग भारत-चीन इंटरनेशनल बॉर्डर है। जो सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इसलिए आम तौर पर सीमा की सुरक्षा के लिए हर्षिल घाटी के आसमान में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान निगरानी करते रहते हैं। बता दें कि चिनूक हेलीकॉप्टर 2 साल पहले भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ था और इससे पहले केदारनाथ में भी चिनूक हेलीकॉप्टर लैंड कर चुका है.
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