कर्नाटक निकाय चुनाव में कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही विपक्ष ने ईवीएम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
लोकसभा चुनाव के नतीजों के आने के ठीक एक हफ्ते बाद कनार्टक निकाय चुनाव के नतीजे आए हैं। इस चुनाव में शानदार जीत के बाद कांग्रेस पार्टी ने दो अहम सवाल पूछे हैं। पहला ये कि ये वही जनता है, जिसने कुछ दिन पहले कर्नाटक में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के खिलाफ वोट किया था और गठबंधन को बुरी तरह हार मिली थी। ऐसे में पार्टी का सवाल ये है कि आखिर एक हफ्ते के अंदर मतदाता का मूड कैसे बदल गिया?
कांग्रेस का कहना है कि निकाय चुनाव में ईवीएम राज्यस्तर के चुनाव अधिकारियों के कब्जे में था, जिन्होंने चुनाव अपने स्तर पर करवाया। वहीं जब लोकसभा चुनाव हुए थे, तो उस वक्त ईवीएम सीधे तौर पर केंद्र से निगरानी की जा रही थी। पार्टी ने सवाल पूछा है कि कहीं इसी वजह से तो नहीं नतीजे ठीक आए हैं और उसे बंपर जीत मिली है।
निकाय चुनाव कांग्रेस और जेडीएस ने अलग-अलग लड़ा है। राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, 56 शहरी स्थानीय निकायों में 1,221 वार्डों में से कांग्रेस ने 509 वार्डों में जीत दर्ज की है। वहीं बीजेपी के खाते में 366 स्थानों पर जीत मिली। अकेले चुनाव लड़ने वाली जेडीएस को 174 वार्डों में जीत मिली, जबकि 160 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजई हुए हैं। इसके अलावा बीएसपी को 3, सीपीआईएम को दो और अन्य दलों को 7 सीटें मिलीं।
7 नगर परिषदों के 217 वार्डों, 30 नगरपालिका परिषदों के 714 वार्डों और 19 नगर पंचायतों के 290 वार्डों के परिणाम घोषित किए गए। कांग्रेस ने नगर परिषदों में 90 वार्ड जीते, जबकि बीजेपी और जेडीएस ने क्रमशः 56 और 38 वार्ड जीते हैं।
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