स्थायी नियुक्ति और पेंशन की मांग को लेकर अल्मोड़ा जिला कलेक्ट्रेट में आंदोलन करने वाले एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्लों के आंदोलन को 11 साल पूरे हो गए हैं।
गुरिल्लों ने सोमवार को अल्मोड़ा के चौघानपाटा में धरना दिया। गुरिल्लों ने कहा कि आगामी एक नवंबर से वह गांव-गांव जाकर अन्य गुरिल्लों को जागरूक करने का काम करेंगे और इसके बाद सभी गुरिल्ले दिल्ली और देहरादून में बड़ा आंदोलन करेंगे।
एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्ला संगठन के जिलाध्यक्ष शिवराज बनौला के मुताबिक, 1962 में चीन युद्ध के बाद एसएसबी द्वारा स्वयं सेवकों को प्रशिक्षण दिया गया था। आपातकाल के समय गुरिल्लाओं को एसएसबी ने कई महीनों का प्रशिक्षण भी दिया था। उत्तराखंड में आज भी 21 हजार से ज्यादा एसएसबी गुरिल्ला हैं, जिन्हें एसएसबी ने कई महीनों का प्रशिक्षण दिया है। ये गुरिल्ले आपातकाल के समय सेना को गुप्त सूचनाएं पहुंचाने का काम करते हैं। 2002 के बाद गुरिल्लों का प्रशिक्षण बंद हो गया था। इसके बाद गुरिल्लों का सत्यापान केंद्र और राज्य सरकार कर चुकी है। बूवजदू इसके इनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया।
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