LAC विवाद के बीच उत्तराखंड के ‘लाल’ CDS बिपिन रावत की दहाड़, चीन को सबक सिखाने को लेकर दिया बड़ा बयान!

उत्तराखंड के लाल और तीनों सेना के प्रमुख यानी सीडीएस बिपिन रावत ने एक बार फिर दुश्मन देश को सबक सिखाने की बात कही है।

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच सीडीएस बिपिन रावत ने जो कुछ कहा है, उसने एक बार फिर उत्तराखंड वासियों और देश के लोगों के बीच ये संदेश पहुंचाया है कि चाहे कोई भी हो जब तक देश की रक्षा भारतीय सेना कर रही है, तब तक किसी भी भारतीय को डरने की जरूरत नहीं है।

बिपिन रावत के बयान से चीन को साफ संदेश दिया गया है कि हम किसी से डरने वालों में नहीं है, बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से देना बखूबी जानते हैं। दरअसल, बिपिन रावत ने एक अखबार से खास बातचीत में कहा है कि अगर चीन से बातचीत नाकाम होती है तो सैन्य विकल्प तैयार है। सीडीएस रावत ने कहा चीन से कूटनीतिक स्तर पर बातचीत चल रही है। दोनों देशों की सेनाएं भी शांतिपूर्ण तरीके से मसले को हल करने में जुटी हैं।

सीडीएस बिपिन रावत ने कहा है, ‘’पूर्वी लद्दाख में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की तरफ से किए गए बदलावों से निपटने के लिए एक सैन्य विकल्प मौजूद है। केवल दो देशों की सेनाओं के बीच बातचीत होने पर ही उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। एलएसी के साथ हुए बदलाव अलग-अलग धारणाओं के कारण होते हैं। रक्षा सेवाओं पर निगरानी रखने और घुसपैठ को रोकने के लिए ऐसे अभियानों को रोकने का काम सौंपा जाता है।

सीडीएस बिपिन रावत ने आगे बताया कि ‘रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार सभी लोग इस उद्देश्य के साथ सभी विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं कि पीएलए लद्दाख में यथास्थिति बहाल करना चाहता है।’ 2017 में जब भारत और चीन के बीच 73 दिनों का गतिरोध हुआ था उस समय सीडीएस रावत सेनाध्यक्ष का पदभार संभाल रहे थे। उन्होंने इस धारणा को दूर किया कि प्रमुख खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी है।

आपको बता दें, 16 मार्च, 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में पैदा हुए सीडीएस बिपिन रावत के पिता लक्ष्मण सिंह रावत भी सेना में रहे हैं। वे लेफ्टिनेंट जनरल पद से रिटायर हुए। स्कूली शिक्षा के बाद बिपिन रावत ने इंडियन मिलिट्री अकेडमी, देहरादून और फिर डिफेंस स्टाफ कॉलेज में प्रवेश लिया। उन्हें 16 दिसंबर, 1978 को 11 गोरखा रायफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला। उनके पिता भी इसी बटालियन का हिस्सा रहे थे। उनकी पहली पोस्टिंग मिजोरम में हुई थी और उन्होंने इस बटालियन का नेतृत्व भी किया। इस दौरान उनकी बटालियन को उत्तर पूर्व की सर्वश्रेष्ठ बटालियन चुना गया।

newsnukkad18

Recent Posts

उत्तराखंड मौसम अपडेट: 11 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट, आज कहां-कहां होगी बारिश?

उत्तराखंड के देहरादून और उत्तरकाशी में आज कई जगह हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान…

2 weeks ago

अंकिता भंडारी को न्याय की मांग पर दिल्ली में बवाल, माता-पिता हिरासत में, दुष्यंत गौतम को 24 घंटे का अल्टीमेटम

अंकिता भंडारी के माता-पिता, पवन खेड़ा समेत कई प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में…

2 weeks ago

दिल्ली की सड़कों पर महिलाओं का हक़: ‘रिक्लेम द नाइट’ वॉक में उमड़े नागरिक

9 अक्टूबर की रात लोधी गार्डन से इंडिया गेट तक निकली 'रिक्लेम द नाइट' पदयात्रा…

2 weeks ago

उत्तराखंड: UTU में कथित पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस का मार्च, उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बीच उत्तराखंड में भी प्रश्नपत्र लीक का…

3 months ago

प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद फैसला

केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को…

3 months ago

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने खत्म किया आंदोलन, छात्रों से की जंतर-मंतर खाली करने की अपील

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का आंदोलन…

3 months ago

This website uses cookies.