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उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान CAG की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वन संरक्षण के लिए निर्धारित धन का इस्तेमाल आईफोन और ऑफिस सजावट के सामान खरीदने के इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा भी कइ तरह के नियमों का उल्लंघन किया गया।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि CAMPA के फंड को वनीकरण से संबंधित कामों पर खर्च की बाजय अन्य मदों पर खर्च किया गया। टैक्स पेमेंट के लिए जीका प्रोजेक्ट को 56.97 लाख रुपये रिडायरेक्ट किए गए। जबकि यह पैसा इसके लिए नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, डीएफओ अल्मोड़ा ऑफिस में बिना किसी मंजूरी के सोलर फेंसिंग पर 13.51 लाख खर्च कर दिए गए।
CAMPA को फंड मिलने के बाद उसका इस्तेमाल 1 साल के भीरतर करना होता है, लेकिन 37 मामलों में इस फंड का इस्तेमाल करने में 8 साल लगा दिए गए। केंद्र सरकार ने सड़क, पावर लाइन, वाटर सप्लाई लाइन, रेलवे और ऑफ रोड लाइन के लिए औपचारिक सहमति दी थी, लेकिन इसके बावजूद डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर मंजूरी जरूरी होती है। हैरानी की बात यह है कि 2017 से 2022 के बीच 52 मामलों में DFO की मंजूरी ली ही नहीं गई।
CAG की इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2022 तक जो वृक्षारोपण किया गया, उसमें से सिर्फ 33 फीसदी ट वृक्ष ही जिंदा रह पाए। यह वन अनुसंधान संस्थान द्वारा निर्धारित 60-65 फीसदी से कम है। रिपोर्ट में सरकारी अस्पतालों में एक्सपायर हो चुकी दवाओं के वितरण पर भी चिंता जाहिर की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कम से कम 3 सरकारी अस्पतालों में 34 एक्सपायर हो चुकी दवाओं का स्टॉक था। उनमें से कुछ की एक्सपायरी डेट दो साल से भी पहले हो चुकी थी।
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