नैनीताल हाईकोर्ट ने चमोली के गैड़ा गांव में रक्षित वन भूमि पर मानकों के विपरीत आवंटित खनन पट्टा के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए केन्द्र और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
साथ ही हाई कोर्ट ने खनन पट्टा के अनुज्ञापी को भी नोटिस जारी किया है। मामले को चमोली के रहने वाले प्रकाश सिंह बिष्ट की ओर से चुनौती दी गयी है। इस प्रकरण की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ की अगुवाई वाली युगलपीठ में हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि राज्य सरकार ने साल 2011 में मानकों के उलट उत्तराखंड के रक्षित वन भूमि को वन की परिभाषा से बाहर कर दिया था और इन पर पट्टे आवंटित कर दिये गये थे। ऐसे एक खनन पट्टा चमोली जिले के गैड़ा गांव में भी लीज पर आवंटित किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया प्रदेश सरकार की ओर से रक्षित वनों को वन की परिभाषा से बाहर करने के लिये केन्द्र सरकार की इजाजत नहीं ली गई है। सरकार के इस कदम को वर्ष 2017 में उच्च न्यायालय ने भी खारिज कर दिया था और सरकार की ओर से वर्ष 2011 में जारी अधिसूचना को खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ता के वकली प्रभात बोरा ने बताया कि मामले को सुनने के बाद अदालत ने केन्द्र और राज्य सरकार दोनों से इस मामले में चार सप्ताह के अंदर जवाब पेश करने को कहा है। साथ ही आवंटित पट्टा के अनुज्ञापी विपिन सिंह राणा को नोटिस जारी किया है।
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