प्रदेश सरकार एक तरफ हर घर पानी पहुचाने की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ बरसात के बाद ही राज्य के कई इलाकों में पानी की किल्लत होने लगी है।
चौबटयाखाल, लैंसडाउन, दो तहसीलों, सतपुली और लैंसडाउन के अंतर्गत आने वाले इलाकों में पानी की भारी किल्लत हो रही है। करीब 25 साल पुरानी इस योजना से इलाके के करीब कई गांव कांडा पम्पिंग पेयजल योजना से जुड़े हैं। आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद अधिकारियों परेशानी को दूर करने के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं।
खबरों के मुताबिक, यहां सड़क कटने की वजह से कुछ गांव में पानी की किल्लत हो रही है। फॉल्ट नही मिल रहा है और दूसरी ओर जो मोटरे विगत 3 साल पहले लगी थी वो बंद पड़ी है जो 25 साल पुरानी है वो उतना कार्य नही कर पा रही है।
बताया जाता है कि साल 2016-17 में इस योजना के लिए 30 लाख का बजट मंजूर किया गया था, जिसमें दो पम्प हाउसों में दो-दो नई मोटरे लगी और बाकी पैसे योजना पर खर्च किए गए थे। आरोप है कि मोटरे सुचारू रूप से सिर्फ 6 महीने तक ही ठीक से चली उसके बाद रिपेरिंग पर रिपेरिंग होती रही। एक तरफ सरकार 1 रुपये में कनेक्सन देने की बात कर रही है, दूसरी ओर जल संस्थान के अधिकारी कुम्भकर्ण की नींद सो रहे हैं। जनता बेचारी काम काज छोड़कर अपने पुराने स्रोतों में घंटों पानी के लिए लानइ में लगती है।
(पौड़ी गढ़वाल से इंद्रजीत की रिपोर्ट)
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