उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश को अग्रिम जमानत का प्रावधान देने वाले बिल को मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिल पर मुहर लगा दी है।
देश में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ही ऐसे दो राज्य हैं, जहां अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है। आपातकाल के दैरान दोनों राज्यों में अग्रिम जमानत देने कानून को खत्म कर दिया गया था। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस कानून को दोबारा अब लागू किया जाएगा। करीब 40 साल बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस कानून को दोबारा लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उत्तर प्रदेश के सीआरपीसी की धारा 438 के तहत संशोधन किया जाएगा। संशोधित कानून के अनुसार अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपी के मौजूद रहने की अनिवार्यता खत्म हो जाएगी।
इस कानून के तहत कोर्ट के पास अग्रिम जमानत देने के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखने का अधिकार होगा। गंभीर अपराध के मामलों में कोर्ट चाहे तो अग्रिम जमानत देने से इनकार भी कर सकता है।जिन मामलों में दोषी को फांसी की सजा मिली हो या जो मामला गैंग्सटर एक्ट के तहत दर्ज हों, उनमें अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं होगा।
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