उत्तराखंड की प्रकृति से हर कोई वाकिफ है। यहां पहाड़ों पर कई तरह की जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जो कई बीमारी में बहुत की फायदेमंद होती हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ों में पाए जाने वाला ऐसा ही एक पौष्टिक फल है जिसे कुमाऊं में पांगर के नाम से जाना जाता है। इस फल के आवरण पर बहुत की ज्यादा कांटे होते हैं। लेकिन ये फल कई बीमारी में बहुत ही लाभकारी होता है। पांगर पहाड़ों पर बड़ी तादाद में पाया जाता है।
वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक पांगर गठिया रोग के इलाज के लिए बहुत कारगर है। इसे दवा के रूप में लिया जाता है। लगभग 1500 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर उगने वाले इस पेड़ की औसत उम्र 300 साल है। पेड़ पर फलने वाला फल गठिया बीमारी ठीक करने के लिए फायदेमंद त है ही। वहीं यह पेड़ पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन को रोकने और जल संवर्धन में भी बेहद कारगर है। ये फल 300 से 400 रुपये तक बिकता है।
कैसे किया जाता है सेवन?
इसे हल्की आंच में भूना या उबाला जाता है। इसके बाद इसका दूसरा आवरण चाकू से निकालने के बाद इसके मीठे गूदे को खाया जाता है। ये फल ब्रिटिश काल में मध्य यूरोप से भारत आया और इसे अंग्रेजों के बंगलों और डाक बंगलों में लगाया गया था। ऐसे ही कुछ वृक्ष मानिला के फॉरेस्ट डाक बंगले में आज भी हैं। जो इन दिनों फलों से लदे हुए हैं।
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