फोटो: सोशल मीडिया
पौड़ी से करीब 16 किलोमीटर दूर खिर्सू में बने होम स्टे बासा में आपको विशुद्ध पहाड़ी कल्चर देखने को मिलेगा।
उत्तराखंड के पहाड़ सैलानियों को अपनी ओर खींच लाते हैं। प्रकृति के मनमोहक द्रश्य आंखों को सुकून देते हैं। इन्हीं पहाड़ियों के बीच बसे खिर्सू की सुरम्य वादियां पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं। यहीं पर बना है पहाड़ी शैली में बना रात्रि विश्राम स्थल बासा। जिला मुख्यालय पौड़ी से करीब 16 किलोमीटर दूर खिर्सू में बने इस होम स्टे की शुरुआत साल 2020 जनवरी में हुई है। जिला प्रशासन ने जिला योजना के तहत पहाड़ी शैली में इसका निर्माण कराया है और संचालन की जिम्मेदारी उन्नति ग्राम समूह से जुड़ी हुई महिलाओं को सौंपी गई है।
इस जगह पर किसी भी पर्यटक का स्वागत पहाड़ी रस्मो-रिवाज के मुताबिक किया जाता है। खाना भी चूल्हे पर बनता है और वो भी विशुद्ध पहाड़ी। यहां के मेन्यू में मुख्य रूप से मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर, गहत (कुलथ) की दाल और फाणू, चैंसू और कढ़ी-झंगोरा शामिल हैं। लॉकडाउन में जब सब कुछ बंद था तो ये विश्राम स्थल भी बंद रहा, लेकिन अब इसे पर्यटकों के लिए दोबारा खोल दिया गया है।
रुकने का क्या है खर्च?
बासा में दो शख्स के खाने और एक रात के लिए रुकने का खर्च करीब तीन हजार रुपये है। बुकिंग ऑनलाइन की जा सकती है। प्रसिद्ध शिकारी जॉय हुकील बासा में ठहरने वाले सैलानियों को न सिर्फ वाइल्ड लाइफ से जुड़े किस्से-कहानियां, बल्कि रोमांचक अंदाज में शिकार से जुड़े अपने अनुभव भी सुनाते हैं। सैलानी कभी हॉल में उनसे किस्से-कहानियां सुनते हैं तो कभी बासा के आंगन में। इस दौरान सैलानियों को पहाड़ी रीति-रिवाज, संस्कृति आदि के बारे में जानकारी भी दी जाती है। आपको बता दें कि जॉय हुकील अब तक 38 आदमखोर गुलदारों को मार चुके हैं।
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