फोटो: सोशल मीडिया
उत्तराखंड में आई तबाही के बाद केंद्र सरकार ने ये फैसला किया है कि अब ग्लेशियर की मॉनिटरिंग की जायेगी ताकि आने वाली तबाही का पहले ही पता लगा लिया जाये।
वैसे ये कोई आसान काम नहीं है क्योंकि उत्तराखंड के गंगा बेसिन में छोटे-बड़े करीब एक हज़ार ग्लेशियर हैं। वैसे ग्लेशियर का फटना एक प्राकृतिक आपदा है लेकिन वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल ये कि फरवरी में ठंड के महीने में ये ग्लेशियर फटा कैसे। आपको वीडियो के जरिये समझाते हैं कि आखिर ग्लेशियर पिघलता कैसे है और जब बर्फ का हिस्सा टूट कर गिरता है तो कैसे भयंकर तबाही मचती है।
माना जा रहा है कि उत्तराखंड के चमोली में भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा। बर्फ का हिस्सा टूट कर गिरा। जिसके बाद सैलाब आ गया। जो अपने साथ सब कुछ बहा ले गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बीच उत्तराखंड में भी प्रश्नपत्र लीक का…
केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को…
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का आंदोलन…
उत्तराखंड के चमोली विकास परियोजनाओं को नई रफ्तार देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह…
उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित श्री बद्रीनाथ धाम में दान के प्रबंधन को लेकर सामने…
दिल्ली में झुग्गी बस्तियों को हटाकर लोगों को पुनर्वास स्थलों पर भेजने की प्रक्रिया पर…
This website uses cookies.