कर्ज में डूबी सरकारी टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल की हालत धीरे-धीरे और खराब होती जा रही है। कर्ज इतना बढ़ गया है कि कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रही है।
बीएसएनएल ने अपने कर्मचारियों को जून की सैलरी देने में असमर्थता जताई है। बीएसएनएल के कॉर्पोरेट बजट ऐंड बैंकिंग डिविजन के सीनियर जनरल मैनेजर पूरन चंद्र ने टेलिकॉम मिनिस्ट्री को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि हर महीने के रेवेन्यू और खर्चों में गैप के चलते अब कंपनी का संचालन जारी रखना मुश्किल हो गया है। क्योंकि कर्ज अब ऐसे लेवल पर पहुंच गया है जहां बिना किसी पर्याप्त इक्विटी को शामिल किए BSNL के ऑपरेशंस जारी नहीं रख पाएगी।
बीएसएनएल इस वक्त सबसे ज्यादा घाटा सहने वाली पीएसयू है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसएनएल को दिसंबर, 2018 के आखिर तक 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का परिचालन नुकसान झेलना पड़ा था।
पीएम से दखल देने की मांग
बीएसएनएल के इंजीनियरों और पेशेवरों के एक संघ ने पीएम मोदी को खत लिख कर कंपनी को दोबारा उठाने के लिए हस्ताक्षेप करने की मांग की है। खत में संघ ने कहा कि उन कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए जो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं। आपको बता दें कि खुद प्रधानमंत्री ने कुछ महीने पहले ही बीएसएनएल के हालात का जायजा लिया था। हालांकि पीएम के जायजा लेने के बाद भी हालात ठीक नहीं हुए हैं, बल्कि पहले से और खराब हो गए हैं।
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